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संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (CTUs) के समर्थन से सोमवार को मालेरकोटला में जोरदार ‘जेल भरो’ आंदोलन और विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। ऐतिहासिक ‘भारत छोड़ो दिवस की 84वीं वर्षगांठ’ के अवसर पर आयोजित इस प्रदर्शन में किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों और महिलाओं समेत मेहनतकश वर्गों ने सड़कों पर उतरकर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर हुंकार भरी। भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के जिला महासचिव केवल सिंह भड़ी ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर चले ऐतिहासिक किसान आंदोलन के दौरान 9 दिसंबर 2021 को केंद्र सरकार ने लिखित आश्वासन दिए थे। लेकिन सालों बीत जाने के बाद भी सरकार अपने वादों से मुकर रही है, जिसके विरोध में आज देशव्यापी आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ा है। किसानों और मजदूरों की मुख्य मांगें: MSP की कानूनी गारंटी: सभी फसलों के लिए $C2+50\%$ फार्मूले के तहत एमएसपी (MSP) की कानूनी गारंटी दी जाए और सरकारी खरीद सुनिश्चित की जाए। कर्ज माफी व मुआवजा: किसानों और मजदूरों का संपूर्ण कर्ज माफ हो तथा किसान आत्महत्या पीड़ित परिवारों को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। श्रम कानूनों व बिजली निजीकरण का विरोध: चारों नए लेबर कोड रद्द किए जाएं और बिजली संशोधन विधेयक (निजीकरण) को वापस लिया जाए। रोजगार और सामाजिक सुरक्षा: मनरेगा के तहत वर्ष में 200 दिन का काम व ₹700 दैनिक मजदूरी तय की जाए, साथ ही किसानों को ₹10,000 मासिक पेंशन दी जाए। आंदोलन में जुटी दिग्गजों की फौज इस विशाल रोष प्रदर्शन में जोगिंदर सिंह औलख, जिला प्रधान कुलविंदर सिंह भूदन, बूटा खां संगैण, सरबजीत सिंह, कामरेड देव राज वर्मा, भरपूर सिंह बुलापुर, कामरेड मोहम्मद खलील, सुरिंदर भैणी, गुरमेल कौर दुलमा और गुरमीत कौर कुताला सहित भारी संख्या में किसान, मजदूर और महिला कार्यकर्ताओं ने शिरकत की।
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