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चंडीगढ़ में अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार में देरी:पुलिस को नोटिस, 18 दिन से पहचान की सूचना नहीं; 6 मामलों का रिकॉर्ड भेजा




चंडीगढ़ में अज्ञात शवों की पहचान और अंतिम संस्कार में हो रही देरी को लेकर सवाल उठे हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वकील एचसी अरोड़ा ने इस संबंध में चंडीगढ़ प्रशासन और पुलिस को कानूनी नोटिस भेजा है। उन्होंने अज्ञात शवों की पहचान, पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को समयबद्ध करने की मांग की है। वकील ने 9 अगस्त को चंडीगढ़ के प्रशासक और एसएसपी को कानूनी मांग नोटिस भेजा। इसमें कहा गया है कि अज्ञात शव मिलने के बाद उनकी पहचान के लिए सार्वजनिक सूचना जारी करने में ही 18-18 दिन तक लग रहे हैं। इसके बाद भी पहचान के लिए इंतजार किया जाता है। इससे शवों के अंतिम संस्कार में अनावश्यक देरी हो रही है। एचसी अरोड़ा ने मांग की है कि अज्ञात शव मिलने से लेकर पहचान के प्रयास, पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार तक की पूरी प्रक्रिया सात दिन के भीतर पूरी की जाए। 8 मामलों का रिकॉर्ड देकर उठाए सवाल वकील एचसी अरोड़ा ने नोटिस में चंडीगढ़ पुलिस की ओर से समाचार पत्रों में प्रकाशित छह सार्वजनिक सूचनाओं का तुलनात्मक विवरण दिया है। इन मामलों में शव मिलने और पहचान के लिए सार्वजनिक सूचना प्रकाशित होने के बीच 7 से 18 दिन तक का अंतर सामने आया है। नोटिस के अनुसार, 24 जनवरी को जीएमएसएच-32 के पास करीब 51 वर्षीय अज्ञात व्यक्ति का शव मिला था। इसके बाद पहचान के लिए सार्वजनिक सूचना 6 फरवरी को समाचार पत्र में प्रकाशित की गई। यानी शव मिलने के करीब 13 दिन बाद पहचान की सूचना प्रकाशित हुई। इसी तरह 6 फरवरी को मिले करीब 55 वर्षीय व्यक्ति के शव की पहचान के लिए सूचना 17 फरवरी को प्रकाशित की गई। इस मामले में भी शव मिलने और सूचना प्रकाशित होने के बीच 11 दिन का अंतर रहा। सिलसिलेवार तरीके से जाने…… सुधार नहीं हुआ तो हाईकोर्ट जाएंगे एचसी अरोड़ा ने कहा है कि यदि एक सप्ताह के भीतर व्यवस्था में सुधार के लिए जरूरी निर्देश जारी नहीं किए गए तो वह पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे। नोटिस में प्रस्तावित कानूनी कार्रवाई का खर्च संबंधित अधिकारियों के जोखिम और लागत पर होने की बात भी कही गई है। पुलिस की पूरी प्रक्रिया पर सवाल वकील का कहना है कि यह मामला केवल कुछ अज्ञात शवों तक सीमित नहीं है। इससे शव मिलने के बाद पहचान, रिकॉर्ड तैयार करने, सार्वजनिक सूचना जारी करने, पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया की समयबद्धता पर सवाल उठ रहे हैं।



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