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चंडीगढ़ जेल से अस्पताल आने वाले कैदियों का रिकॉर्ड मांगा:होटल में वाधवा पकड़ा, बीमार हैं तो मेडिकल बोर्ड से जांच कराएं




चंडीगढ़ बुड़ैल जेल में बंद कैदियों के इलाज के नाम पर बार-बार जेल से बाहर आने को लेकर चंडीगढ़ पुलिस एक्शन मूड में आ गई है। पुलिस ने जेल प्रशासन से ऐसे कैदियों का रिकॉर्ड मांगा है, जो बीमारी या अस्पताल में जांच के नाम पर बार-बार जेल से बाहर जाते हैं। पुलिस यह पता लगाना चाहती है कि किन कैदियों को कितनी बार अस्पताल ले जाया गया और उन्हें जेल से बाहर ले जाने की जरूरत वास्तव में थी या नहीं। ये कदम पुलिस विभाग को तब उठाना पड़ा क्योंकि दो दिन पहले ही चंडीगढ़ बुड़ैल जेल से चंडीगढ़ और हरियाणा में चर्चित ₹661 करोड़ के सरकारी फंड घोटाले के आरोपी विक्रम वाधवा जेल से इलाज के बहाने बाहर आया था, लेकिन होटल में पहुंच गया, जहां उसका परिवार मौजूद था। उसके, एसआई जगमेहर सिंह, एएसआई सुरेश कुमार, वाधवा के बेटे कुणाल और करण पर एफआईआर दर्ज की गई थी। सूत्रों के अनुसार पुलिस को शक है कि कुछ कैदी जेल की डिस्पेंसरी में तैनात स्टाफ की मिलीभगत से बीमारी का बहाना बनाकर अस्पताल जाने की अनुमति लेते हैं। आरोप यह भी है कि अस्पताल ले जाने के बाद कुछ कैदी पुलिसकर्मियों की मिलीभगत से अपने परिजनों से मिलते हैं और जेल लौटने के बजाय कुछ समय बाहर बिताते हैं। इसी तरह की शिकायतों और पुराने मामलों को देखते हुए पुलिस विभाग की ओर से जेल प्रशासन को पत्र भेजकर रिकॉर्ड मांगा गया है। बीमार हैं तो मेडिकल बोर्ड से जांच कराएं पुलिस की ओर से जेल प्रशासन के सामने यह सवाल भी उठाया गया है कि अगर कुछ कैदी बार-बार बीमार पड़ रहे हैं तो उनकी जांच डॉक्टरों के बोर्ड से क्यों नहीं कराई जाती। पुलिस का कहना है कि जेल की डिस्पेंसरी में डॉक्टर और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है। ऐसे में मामूली बीमारी के लिए कैदियों को बार-बार जेल से बाहर अस्पताल ले जाने की जरूरत पर भी जांच होनी चाहिए। पुलिस ने यह भी सुझाव दिया है कि गंभीर बीमारी होने पर ही कैदियों को पीजीआई, जीएमसीएच-32 या अन्य बड़े अस्पतालों में भर्ती कराया जाए। इससे यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि कैदी को वास्तव में अस्पताल ले जाने की जरूरत थी या नहीं। अस्पताल ले जाने के नाम पर बाहर आते पुलिस सूत्रों के मुताबिक जेल से अस्पताल तक कैदियों को ले जाने और वापस लाने के लिए पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाती है। करीब 20 पुलिसकर्मी रोजाना कैदियों को अस्पतालों में चेकअप के लिए ले जाने की ड्यूटी पर रहते हैं। सुबह करीब 9 बजे चंडीगढ़ पुलिस की बस कैदियों को बुड़ैल जेल से लेकर अस्पतालों तक जाती है। चेकअप के बाद कैदियों को इसी व्यवस्था के तहत वापस जेल लाया जाता है। हालांकि आरोप है कि कुछ मामलों में कैदियों को अस्पताल से वापस जेल लाने की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया जाता। कुछ कैदियों को पुलिसकर्मियों की निजी गाड़ियों में वापस लाए जाने की बात भी सामने आई है। कुछ कैदियों के अपनी गाड़ियों से वापस जेल पहुंचने के आरोप हैं। पैसे वाले कैदियों पर खास मेहरबानी सूत्रों के अनुसार आरोप है कि कुछ पैसे वाले कैदियों को इलाज के नाम पर लंबे समय तक जेल से बाहर रखा जाता है। आरोप है कि पुलिसकर्मी उन्हें दिनभर बाहर घुमाते हैं और शाम को वापस बुड़ैल जेल छोड़ आते हैं। यह भी आरोप है कि कुछ कैदी अपने साथ खास पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगवाने के लिए पुलिस लाइन के मुंशी स्टाफ से सिफारिश करवाते हैं। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब पुलिस यह जांच करेगी कि अस्पताल ले जाते समय किन पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगती है और क्या कुछ कैदियों के साथ बार-बार उन्हीं पुलिसकर्मियों को भेजा जाता है। रिकॉर्ड से खुलेंगे कैदियों के राज पुलिस ने जेल प्रशासन से ऐसे कैदियों का रिकॉर्ड मांगा है, जिन्हें बार-बार इलाज या चेकअप के नाम पर जेल से बाहर ले जाया गया। रिकॉर्ड में कैदी का नाम, बीमारी, अस्पताल, चेकअप की तारीख, कितनी बार बाहर ले जाया गया और उसके साथ कौन-कौन से पुलिसकर्मी तैनात थे, जैसी जानकारी की जांच की जा सकती है। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कैदियों को जेल की डिस्पेंसरी में उपलब्ध इलाज से राहत क्यों नहीं मिली और किन मामलों में उन्हें बाहर के अस्पताल भेजने की जरूरत पड़ी। पुलिसकर्मियों की ड्यूटी भी जांच के दायरे में जांच में सिर्फ कैदियों का रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि उनके साथ अस्पताल जाने वाले पुलिसकर्मियों की ड्यूटी भी जांच के दायरे में आ सकती है। अगर किसी कैदी को बार-बार अस्पताल ले जाया गया है और हर बार उसके साथ एक ही पुलिसकर्मी या कुछ चुनिंदा कर्मचारियों की ड्यूटी लगी है तो इसकी भी जांच की जाएगी। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं अस्पताल ले जाने की प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल तो नहीं हो रहा। अगर जांच में नियमों की अनदेखी या मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित कैदियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।



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