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पलवल में अखिल भारतीय किसान सभा की जिला कमेटी की बैठक में इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि अलग कृषि डिस्कॉम बनने से किसानों के लिए बिजली महंगी हो जाएगी। उन्होंने हरियाणा सरकार के इस फैसले पर चिंता व्यक्त की। मीटिंग के बाद किसानों और बिजली कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। बैठक को संबोधित करते हुए सुभाष लांबा ने कहा कि, राज्य सरकार ने 15 अगस्त से कृषि क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए अलग से हरियाणा कृषि बिजली वितरण निगम बनाने का निर्णय लिया है। शुरुआत से ही हो सकती है आर्थिक स्थिति कमजोर : लांबा लांबा के अनुसार, यह नया निगम 5,427 करोड़ रुपए की देनदारियों के साथ शुरू हो रहा है, जिससे इसकी आर्थिक स्थिति शुरुआत से ही कमजोर हो सकती है। उन्होंने बताया कि अलग डिस्कॉम बनने से किसानों को मिलने वाली क्रॉस सब्सिडी बंद हो जाएगी, जिससे बिजली महंगी हो जाएगी और उनकी पहुंच से दूर हो जाएगी। लांबा ने आरोप लगाया कि सरकार यह कदम निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए उठा रही है, ताकि वे किसानों को बिजली आपूर्ति से आसानी से बाहर कर सकें। इन नीतियों के विरोध में बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने 11, 12 और 13 अगस्त को तीन दिवसीय हड़ताल पर जाने की घोषणा की है। अखिल भारतीय किसान सभा ने इस हड़ताल का पूर्ण समर्थन किया है। यह बैठक जाट धर्मशाला में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता जिला प्रधान रूप राम तेवतिया ने की। बैठक का संचालन जिला सचिव दरियाव सिंह ने किया। 10 अगस्त को सत्याग्रह और जेल भरो आंदोलन उन्होंने बताया कि, 10 अगस्त को सत्याग्रह और जेल भरो आंदोलन के संबंध में अखिल भारतीय किसान सभा के प्रधान रूप राम तेवतिया, पूर्व प्रधान धर्मचंद घूघेरा व सचिव दरियाव सिंह ने संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए कहा कि दस अगस्त को देश भर में किसान-मजदूर मिलकर बड़ा आंदोलन करेंगे। यह सत्याग्रह और जेल भरो आंदोलन केंद्र सरकार की भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापारिक डील, पूंजीपतियों के पक्ष में किए गए श्रम संशोधनों लेबर कोड्स, बिजली के निजीकरण, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी तथा शिक्षा व स्वास्थ्य के व्यापारीकरण के खिलाफ होगा। इस दौरान लाखों की संख्या में किसान, मजदूर, छात्र, नौजवान और महिलाएं प्रदर्शन कर जेल भरेंगे। बैठक को संबोधित करने वालों में धर्मचंद, ताराचंद प्रधान, जगपाल नंबरदार, बलजीत सिंह शास्त्री, विजय देव तेवतिया व किशन चंद शर्मा आदि शामिल थे। बैठक के दौरान काफी संख्या में किसानों, मजदूरों व बिजली कर्मचारी नेताओं ने हिस्सा लिया।
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