![]()
उकलाना के कांग्रेस विधायक नरेश सेलवाल ने कहा कि वर्ष 2009 से 2014 के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में लागू की गई ‘पदक लाओ- पद पाओ’ खेल नीति ने हरियाणा को देश का अग्रणी खेल राज्य बनाया। उन्होंने दावा किया कि इसी नीति के कारण प्रदेश के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभूतपूर्व सफलता हासिल की तथा हरियाणा खेलों के क्षेत्र में देशभर के लिए मिसाल बना। विधायक सेलवाल ने हाल ही में संपन्न कॉमनवेल्थ खेलों में पदक जीतने वाले भारत और हरियाणा के खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि खिलाड़ियों की उपलब्धियां पूरे देश के लिए गर्व का विषय हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को हरियाणा पुलिस में डीएसपी, इंस्पेक्टर सहित विभिन्न सरकारी विभागों में सम्मानजनक पदों पर नियुक्तियां दी जाती थीं। साथ ही उन्हें आर्थिक प्रोत्साहन और बेहतर खेल सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती थीं। हरियाणा के साथ भेदभाव का लगाया आरोप विधायक ने कहा कि वर्तमान सरकार खिलाड़ियों के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में कई खेल स्टेडियमों की स्थिति खराब है और अभ्यास के दौरान अव्यवस्थाओं के कारण खिलाड़ियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि लोकसभा सांसद चौधरी दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी संसद में हरियाणा के खिलाड़ियों के साथ कथित भेदभाव का मुद्दा उठाया है। उनके अनुसार, खेलों में सीमित उपलब्धियों वाले राज्यों को अधिक बजट दिया जा रहा है, जबकि देश को सर्वाधिक पदक दिलाने वाले हरियाणा को अपेक्षाकृत कम संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कांग्रेस शासनकाल में प्रत्येक ब्लॉक में बने खेल स्टेडियम : सेलवाल उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में प्रदेश के प्रत्येक ब्लॉक में खेल स्टेडियमों का निर्माण कराया गया तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के गांवों को आदर्श गांव के रूप में विकसित कर वहां खेल अधोसंरचना और विकास कार्यों को प्राथमिकता दी गई। 2010 की तुलना में प्रदर्शन घटने का लगाया आरोप नरेश सेलवाल ने कहा कि वर्ष 2010 में नई दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ खेलों में भारत ने कुल 101 पदक जीते थे, जिनमें 38 स्वर्ण, 27 रजत और 36 कांस्य पदक शामिल थे। उन्होंने दावा किया कि इनमें अकेले हरियाणा के खिलाड़ियों ने 19 स्वर्ण पदक जीतकर प्रदेश का नाम देशभर में रोशन किया था। उन्होंने कहा कि हाल ही में संपन्न 2026 कॉमनवेल्थ खेलों में भारत ने 39 पदक जीते, जिनमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक शामिल हैं। वहीं हरियाणा के खिलाड़ियों ने 7 स्वर्ण, 2 रजत और 1 कांस्य पदक अपने नाम किए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2010 की तुलना में यह प्रदर्शन कम हुआ है, जिसका कारण खिलाड़ियों के लिए प्रभावी खेल नीति और पर्याप्त सुविधाओं का अभाव है। 2030 कॉमनवेल्थ खेलों में हरियाणा को मिले सह-मेजबानी नरेश सेलवाल ने मांग की कि यदि वर्ष 2030 के कॉमनवेल्थ खेलों की मेजबानी भारत को मिलती है और गुजरात को आयोजन की जिम्मेदारी दी जाती है, तो हरियाणा को भी सह-मेजबान (को-होस्ट) बनाया जाना चाहिए। इससे प्रदेश की खेल संस्कृति को नई मजबूती मिलेगी और खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा के खिलाड़ियों ने हमेशा देश का गौरव बढ़ाया है। इसलिए खिलाड़ियों को सम्मान, आधुनिक खेल सुविधाएं और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
Source link







