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NIA अफसर तंजील हत्याकांड में फांसी की सजा रद्द:हाईकोर्ट ने आरोपी रैय्यान को बरी किया, ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा




इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुरक्षा एजेंसी (NIA) के डिप्टी एसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की हत्या में अहम फैसला सुनाया है। साल 2016 में बिजनौर में हुए चर्चित हत्या के मामले में हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से फांसी की सजा पाए दोषी रैय्यान को बरी कर दिया है।
कोर्ट ने अपने 29 पन्नों के फैसले में अपीलकर्ता रैय्यान को बरी करते हुए कहा कि इस केस के सभी फैक्ट्स और हालात पर गौर करने के बाद कोर्ट का मानना है कि अभियोजन का केस संदेह से भरा है और अभियोजन के गवाहों का बर्ताव बिना किसी वजह के शक वाला है। कोर्ट ने कहा भरोसेमंद सुराग नहीं मिला
कोर्ट ने कहा कि यह नेशनल इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी (NIA) के ऑफिसर और उनकी पत्नी की हत्या का मामला है। ऑफिसर नेशनल सिक्योरिटी से जुड़े कई हाई प्रोफाइल केस की जांच कर रहे थे जिसमें टेररिज्म के मामले भी शामिल हैं। पुलिस पार्टी ने केस को सुलझाने के लिए महीनों तक घटनास्थल पर कैंप किया जैसा कि गवाहों ने माना, पुलिस ने घटनास्थल और उसके आस-पास के कई लोगों को कई दिनों तक हिरासत में रखा लेकिन कोई भरोसेमंद सुराग नहीं मिला।
ट्रायल कोर्ट से सजा हुई
इस मामले में मृतक अपीलकर्ता, मुनीर एक लोकल क्रिमिनल था और अपीलकर्ता रैय्यान को उसके गैंग का मेंबर दिखाया गया था और पुलिस ने केस को सुलझाने के लिए दबाव में सेक्शन सीआरपीसी की धारा 164 के तहत गवाहों के बयानों में सबसे पहले उनका नाम दर्ज करवाया और उसके बाद ट्रायल कोर्ट के सामने अपीलकर्ता और सह आरोपी मुनीर का नाम पहली बार गवाहों ने लिया और उन्हें ट्रायल कोर्ट ने दोषी ठहराया और सज़ा सुनाई।
कोर्ट ने कहा ट्रायल कोर्ट निचले पायदान पर है
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट ने अपील करने वाले को मौत की सज़ा देकर बहुत भारी भूल की है जिसे इस बात से समझा जा सकता है कि हमारे सिस्टम में डर के अनुक्रम (Hierarchy) में ट्रायल कोर्ट सबसे निचले पायदान पर है। इसलिए कोर्ट का मानना है कि ट्रायल कोर्ट का दिया गया फैसला और ऑर्डर रद्द किया जाना चाहिए और इसे रद्द किया जाता है। इसलिए अपील करने वाले को उसके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों से बरी किया जाता है।

ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए रेफरेंस का जवाब बताई गई शर्तों के अनुसार दिया जाता है। कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता सात अप्रैल 2016 से जेल में है। कोर्ट ने अपीलकर्ता रैय्यान की क्रिमिनल अपील को स्वीकार करते हुए कहा कि अगर उसे किसी और मामले में गिरफ्तार नहीं किया गया है तो उसे तुरंत जेल से रिहा करने का निर्देश दिया जाता है। यह आदेश जस्टिस सिद्धार्थ ने अपीलकर्ता रैय्यान की क्रिमिनल अपील पर सुनवाई करते हुए दिया है। जानिये हत्याकांड के बारे में दरअसल बिजनौर के सहसपुर में दो अप्रैल 2016 को राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) के डिप्टी एसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की हत्या के मामले में ट्रायल कोर्ट ने 21 मई 2022 को बिजनौर कोर्ट ने दोषी पाए गए मुनीर और रैयान को फांसी की सजा सुनाई थी। रैयान के साथ ही फांसी की सजा पाए दूसरे आरोपी मुनीर की मौत हो गई। जेल में बंद रैयान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जून 2022 में क्रिमिनल अपील दायर की थी।
अपीलकर्ता रैय्यान ने एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज, बिजनौर के 21 मई 2022 के फैसले और सज़ा के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। दोष ठहराते मौत की सजा दी इस फैसले में रैय्यान को IPC की धारा 302/34 के तहत जुर्म करने का दोषी ठहराया गया था और उसे मौत की सज़ा और एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया था। हाईकोर्ट में अपील के लंबित रहने के दौरान सह-अपीलकर्ता मुनीर की मौत हो गई। अभियोजन पक्ष के मामले के अनुसार इस मामले में FIR मृतक मोहम्मद तनजील के भाई मोहम्मद रागिब मसूद ने तीन अप्रैल 2016 को दर्ज कराई थी। बिजनौर के पुलिस थाना स्योहारा में आईपीसी की धारा 307 के तहत मामला दर्ज किया गया था। FIR के अनुसार अभियोजन की कहानी के मुताबिक दो अप्रैल की देर रात शिकायतकर्ता रागिब मसूद की भतीजी की शादी कस्बा सेहोरा के बंधन बैंक्वेट हॉल में हो रही थी कि और उसका भाई मोहम्मद तंज़ील अपनी पत्नी फरज़ाना और भतीजी ज़िमनिश और भतीजे शाहबाज़ के साथ शादी की रस्म में शामिल होने के लिए वहाँ पहुंचे थे।
शादी की रस्म में शामिल होने के बाद, उसका भाई मोहम्मद तंज़ील अपनी कार में सवार होकर अपनी पत्नी, बेटी और बेटे के साथ शादी की जगह से निकले थे। रात करीब एक बजे सहसपुर की ओर जा रहे थे तभी मोटरसाइकिल पर सवार दो व्यक्ति वहां पहुंचे और कार के पास मोटरसाइकिल रोक दी और उसके भाई, मोहम्मद तंजील और भाभी फरजाना को जान से मारने की नियत से अपने-अपने हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी जिसके परिणामस्वरूप, उसके भाई और भाभी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मौके से हमलावर फरार हो गए थे। अस्पताल में इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई थी। पुलिस द्वारा जांच के बाद बिजनौर की ट्रायल कोर्ट ने आरोपी मुनीर और रैय्यान को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी जबकि अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया था। फैसले के खिलाफ दोषी मुनीर और रैय्यान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की थी। अपील लंबित रहने के दौरान 19 नवंबर 2022 को बीमारी के कारण अपीलकर्ता मुनीर की मौत हो गई थीं जिसके चलते उसकी अपील खत्म हो गई। हाईकोर्ट में रैय्यान की अपील पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। इस मामले में करीब 20 लोगों की गवाही हुई। अभियोजन का केस संदेह भरा है सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि केस के सभी फैक्ट्स और हालात पर गौर करने के बाद कोर्ट का मानना ​​है कि अभियोजन का केस संदेह से भरा है और अभियोजन के गवाहों का बर्ताव बिना किसी वजह के शक वाला है। कोरी ने अपीलकर्ता रैय्यान की क्रिमिनल अपील को मंजूर करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट ने अपीलकर्ता को मौत की सज़ा देकर बहुत बड़ी गलती की है जिसे इस बात से समझा जा सकता है कि हमारे सिस्टम में डर के अनुक्रम में ट्रायल कोर्ट सबसे निचले पायदान पर है। इसलिए कोर्ट का मानना है कि ट्रायल कोर्ट का दिया गया फैसला और ऑर्डर रद्द किया जाना चाहिए और इसे रद्द किया जाता है। इसलिए अपीलकर्ता रैय्यान को उसके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों से बरी किया जाता है।



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