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पठानकोट में मनाया भारतीय जनसंघ के संस्थापक का बलिदान दिवस:भाजपा कार्यकर्ताओं ने माधोपुर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को दी श्रद्धांजलि




पठानकोट के माधोपुर में भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान दिवस मनाया गया। भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने माधोपुर स्थित ‘एकता स्थल’ स्मारक पर पहुंचकर डॉ. मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया।
इस अवसर पर पठानकोट के पूर्व मेयर अनिल वासुदेवा ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी राष्ट्रीय अस्मिता के प्रतीक थे और युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।
वासुदेवा ने डॉ. मुखर्जी के जम्मू-कश्मीर के पूर्ण एकीकरण के लिए किए गए संघर्ष को भी याद किया। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता के लिए उनका योगदान अविस्मरणीय है, और उनके बलिदान के कारण ही जम्मू-कश्मीर आज भारत का अभिन्न अंग है। वासुदेवा के अनुसार, इस कदम से विकास और प्रगति के नए द्वार खुले हैं, और यह डॉ. मुखर्जी के सपने की साकारता है। सबसे कम उम्र के कुलपति बने थे मुखर्जी वहीं, पूर्व डिप्टी स्पीकर ठाकुर दिनेश सिंह बब्बू ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कम उम्र में ही शिक्षा के क्षेत्र में पहचान बनाई और वे केवल 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे कम उम्र के कुलपति बने।
वे स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में राजनीति में सक्रिय हुए और बाद में भारत सरकार में पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री बने। उन्होंने देश के आर्थिक विकास, उद्योगों के विस्तार और राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर काम किया।
1951 में उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जो आगे चलकर भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण धारा बनी। उनका मानना था कि देश की नीतियां राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाली होनी चाहिए।
जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर उन्होंने विशेष प्रावधानों का विरोध किया और “एक देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान नहीं चलेंगे” का नारा दिया। इसी आंदोलन के दौरान 1953 में उन्हें जम्मू-कश्मीर में गिरफ्तार किया गया। कुछ समय बाद 23 जून 1953 को उनका निधन हो गया।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन शिक्षा, राजनीति और राष्ट्रहित से जुड़े कार्यों के लिए जाना जाता है। उनके समर्थक उन्हें देश की एकता के लिए संघर्ष करने वाला नेता मानते हैं और उनके विचारों को भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण योगदान के रूप में देखते हैं।
इस कार्यक्रम में भाजपा के कई पदाधिकारी, कार्यकर्ता और स्थानीय गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।



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