हिसार के किसान दोहरी मार झेल रहा है। एक तरफ जहां गर्मी और मानसूनी उतार-चढ़ाव के बीच फसलों को पानी की सख्त जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ सूबे का नहरी ढांचा पूरी तरह दम तोड़ चुका है। भाखड़ा नेटवर्क से लेकर यमुना कमांड एरिया के आखिरी छोर तक पानी पहुंच ही नहीं रहा है। नहरों की खस्ताहाली, पानी में अवैध कटौती और सरकारी उपेक्षा से नाराज पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। 27 जुलाई को सुबह 11 बजे हिसार डीसी दफ्तर पर विशाल महापड़ाव डाला जाएगा। इसके लिए समिति ने देवा, कालवास, चिड़ौद, कंवारी, हरिता और डाया सहित दर्जनों गांवों में जनसंपर्क कर किसानों को लामबंद करना शुरू कर दिया है। इन मुद्दों पर किसान सरकार को घेरेंगे पूर्व मंत्री संपत सिंह कर चुके हैं खुलासा आईएनएलडी नेता व पूर्व मंत्री संपत सिंह ने एक सेवानिवृत्त सिंचाई इंजीनियर के साथ क्षेत्र का तकनीकी निरीक्षण किया था। उनकी रिपोर्ट में नहरी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी गई है। संपत सिंह का कहना है कि 1954 के समझौते में हरियाणा का 2/3 हिस्सा था, जो 1994 के दबाव में घटकर 47% रह गया। भाखड़ा प्रणाली से आंतरिक पानी मोड़कर यमुना कमांड क्षेत्र को 500 क्यूसेक पानी दिया जा रहा है। इससे नलवा और आदमपुर के आखिरी छोर पर पानी का भारी संकट पैदा हो गया है। खनौरी हेड पर वाटर गेज (पानी मापने का यंत्र) है ही नहीं। बरवाला लिंक चैनल की क्षमता 1750 से घटकर 1250 क्यूसेक रह गई है। तटबंधों को ऊंचा करने के लिए हरियाणा ने पंजाब को 4.65 करोड़ रुपये दिए, लेकिन राजस्थान की आपत्तियों के कारण 2015 से यह काम ठप पड़ा है।
Source link
