हरियाणा में बिजली वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। प्रदेश में पहली बार किसी निजी कंपनी ने सरकारी बिजली निगम के समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के लिए हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) में आवेदन किया है। यदि आयोग मंजूरी देता है तो गुरुग्राम और नूंह में उपभोक्ताओं के पास बिजली सप्लायर चुनने का विकल्प होगा।
एलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड ने 12 मई को यह याचिका दाखिल की थी। आयोग ने 26 मई को इसे सुनवाई योग्य मानते हुए स्वीकार कर लिया। मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी।
क्या बदलेगा?
गुरुग्राम और नूंह में सरकारी कंपनी दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के साथ निजी कंपनी भी बिजली सप्लाई कर सकेगी। उपभोक्ता अपनी पसंद की वितरण कंपनी चुन सकेंगे। भविष्य में इस मॉडल का विस्तार हरियाणा के दूसरे जिलों तक भी हो सकता है। कानून क्या कहता है?
कंपनी ने अपनी याचिका का आधार विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 14 को बनाया है। इस प्रावधान के तहत एक ही क्षेत्र में एक से अधिक बिजली वितरण लाइसेंस जारी किए जा सकते हैं।
कंपनी का कहना है कि यह बिजली निगम के निजीकरण का मामला नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद कानूनी व्यवस्था को लागू करने की पहल है।
सरकारी बिजली निगम पर क्या असर होगा?
याचिका के अनुसार, DHBVN पहले की तरह बिजली आपूर्ति करता रहेगा। उसके अधिकार और जिम्मेदारियों में कोई बदलाव नहीं होगा। नई कंपनी सरकारी नेटवर्क का उपयोग नहीं करेगी। उसे अपना अलग वितरण नेटवर्क खुद तैयार करना और संचालित करना होगा।
कंपनी ने अपनी याचिका में मुंबई के समानांतर बिजली वितरण मॉडल और 11 मार्च को APTEL के फैसले का भी उल्लेख किया है। इसमें चरणबद्ध तरीके से समानांतर वितरण नेटवर्क के विस्तार को स्वीकार किया गया था।
हर वर्ग के उपभोक्ताओं को सेवा देने का दावा
कंपनी ने आयोग को दिए शपथपत्र में कहा है कि लाइसेंस मिलने पर वह, कृषि उपभोक्ताओं
कम आय वाले परिवारों, घरेलू उपभोक्ताओं, औद्योगिक इकाइयों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों,
सभी को समान रूप से बिजली उपलब्ध कराएगी। साथ ही विद्युत अधिनियम की धारा-43 के तहत सार्वभौमिक सेवा दायित्व निभाने का भी वचन दिया है।
₹4,716 करोड़ का निवेश प्रस्ताव
कंपनी ने गुरुग्राम और नूंह में 4,716.73 करोड़ रुपए के निवेश की योजना पेश की है। योजना की प्रमुख बातों में कहा गया है कि ₹1,415.02 करोड़ इक्विटी निवेश, ₹3,301.71 करोड़ ऋण,
80% नवीकरणीय और 20% तापीय ऊर्जा का मिश्रण, स्मार्ट मीटरिंग, डिजिटल बिलिंग, पारदर्शी टैरिफ, समयबद्ध शिकायत निवारण प्रणाली शामिल है। पैरेलल बिजली वितरण लाइसेंस क्या है?
एक ही क्षेत्र में एक से अधिक बिजली वितरण कंपनियों को लाइसेंस मिल सकता है। उपभोक्ता अपनी पसंद की कंपनी से बिजली लेने का विकल्प चुन सकते हैं। नई कंपनी को अपना अलग बिजली वितरण नेटवर्क बनाना होगा। सरकारी बिजली निगम की सेवाएं बंद नहीं होंगी। उद्देश्य प्रतिस्पर्धा बढ़ाना और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा देना है।
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