हरियाणा सरकार ने राजस्व प्रशासन में बड़ा डिजिटल सुधार करते हुए पेपरलेस रजिस्ट्री प्रणाली के दूसरे चरण की शुरुआत कर दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को चंडीगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में नई व्यवस्था लॉन्च करते हुए कहा कि अब प्रदेश में रजिस्ट्री और इंतकाल (म्यूटेशन) की प्रक्रिया पूरी तरह एक-दूसरे से जुड़ जाएगी और नागरिकों को अलग से इंतकाल के लिए आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने इसे राजस्व प्रशासन में बेहतर सुधार बताते हुए कहा कि नई व्यवस्था से लाखों किसानों, भू-स्वामियों और आम नागरिकों को राहत मिलेगी। लाडवा से शुरू हुई थी पहल, अब दूसरा चरण लागू मुख्यमंत्री ने बताया कि 29 सितंबर 2025 को कुरुक्षेत्र के लाडवा तहसील से पेपरलेस रजिस्ट्री प्रणाली की शुरुआत की गई थी। इसके बाद 1 नवंबर 2025 से इसे पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया। अब इसमें कई नए सुधार जोड़कर दूसरे चरण की शुरुआत की जा रही है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब रजिस्ट्री के साथ इंतकाल की प्रक्रिया भी स्वतः शुरू हो जाएगी। इससे जमीन खरीदने वाले लोगों को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। आधार e-KYC अनिवार्य, फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक नई व्यवस्था में रजिस्ट्री के दोनों पक्षों के लिए आधार आधारित e-KYC अनिवार्य कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पहचान की 100 प्रतिशत पुष्टि होगी और फर्जी दस्तावेजों व विवादों की संभावना कम होगी। इसके अलावा पूरी प्रक्रिया में डिजिटल हस्ताक्षर और बायोमेट्रिक सत्यापन लागू किया गया है। NRI और कंपनियों को भी राहत सरकार ने रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक लचीला बनाया है। अब यदि कोई व्यक्ति, कंपनी, संस्था या एनआरआई स्वयं उपस्थित नहीं हो सकता तो वह एक से अधिक प्रतिनिधियों को अधिकृत कर सकेगा। साथ ही डीड को नागरिक स्वयं, डीड राइटर, अधिवक्ता या हेल्प डेस्क की सहायता से भी भर सकेंगे। जमीन की जानकारी होगी ऑटोमैटिक नई प्रणाली में रजिस्ट्री के दौरान ही यह जानकारी स्वतः स्क्रीन पर दिखाई देगी कि संबंधित भूमि का कौन-सा हिस्सा प्राइम श्रेणी में आता है और कौन-सा नॉन-प्राइम श्रेणी में। इससे सर्कल रेट और स्टांप ड्यूटी निर्धारण में पारदर्शिता बढ़ेगी। DTP और NOC का झंझट खत्म मुख्यमंत्री ने बताया कि अब DTP और NOC के लिए अलग से दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होगी। संबंधित विभागों का सत्यापन पूरी तरह ऑनलाइन होगा। इसके अलावा वर्तमान व्यवस्था में अलग-अलग स्तर पर किए जाने वाले RC-1 और RC-2 कार्यों को भी एकीकृत कर दिया गया है, जिससे प्रक्रिया और तेज होगी। 24 घंटे में होगा इंतकाल मुख्यमंत्री ने ऑटो इंतकाल प्रणाली की शुरुआत करते हुए बताया कि जिन मामलों में खेवट विभाजन की आवश्यकता नहीं होगी, उनमें 24 घंटे के भीतर इंतकाल स्वीकृत हो जाएगा।
वहीं जिन मामलों में खेवट विभाजन जरूरी होगा, उनमें अधिकतम 10 दिन के भीतर इंतकाल का निपटारा कर दिया जाएगा। 4 लाख लंबित इंतकाल केस निपटाए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में करीब 5 लाख से अधिक इंतकाल लंबित थे। इनमें से लगभग 4 लाख मामलों का निपटारा किया जा चुका है। ऑटो म्यूटेशन प्रणाली को पहले एक महीने तक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाया गया था। इस दौरान मिले सुझावों और फीडबैक को नई प्रणाली में शामिल किया गया। प्रारंभिक चरण में ही लगभग 50 हजार इंतकाल स्वतः दर्ज किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य अगले 15 दिनों में शेष सभी लंबित इंतकाल मामलों का समाधान करना है।
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हरियाणा में जमीन रजिस्ट्री और इंतकाल अब एक साथ:24 घंटे में होगा ऑटो म्यूटेशन; CM सैनी ने शुरू किया पेपरलेस रजिस्ट्री-2.0
