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सोने-चांदी से जड़ा पहाड़ी माता मंदिर:पुजारी का दावा-उत्तर भारत का पहला, पांडवों के अज्ञातवास में माता ने दिए थे दर्शन, गुंबद में लगा 52 किलो गोल्ड




हरियाणा के भिवानी जिले के गांव पहाड़ी में प्रसिद्ध महाभारतकालीन पहाड़ी माता मंदिर स्थित है। जिसके गुंबद पर करीब 52 किलो सोना जड़ा हुआ है। वहीं मंदिर के गर्भगृह की दीवारों व छत पर चांदी लगी हुई है। इसका इतिहास महाभारत काल से माना जा रहा है। मान्यता है कि पांडव अज्ञातवास में यहां पर रहे थे और उनकी पूजा से प्रसन्न होकर माता ने दर्शन दिए थे। पहाड़ी माता मंदिर के पुजारी सुरेंद्र शास्त्री ने बताया कि पहाड़ी माता मंदिर काफी पुराना है। मान्यता है कि अज्ञात वास के दौरान पांडव यहां पर आए थे। उन्होंने माता की पूजा अर्चना की और उनकी पूजा से प्रसन्न होकर माता ने अपना रूप प्रकट किया। पांडव यहां पहाड़ पर अज्ञात वास में ठहरे भी थे। उन्होंने कहा कि मंदिर के गर्भगृह की दीवारें चांदी से बनी हैं (दीवारों पर चांदी की प्लेट लगी हैं)। मंदिर का गुबंद सोने का है, जिस पर करीब 52 किलो सोना लगा है। माता का ताज भी सोने का बना हुआ है। सीसीटीवी की जद में है मंदिर
पहाड़ी माता मंदिर के पुजारी सुरेंद्र शास्त्री ने बताया कि मंदिर की सुरक्षा के लिहाज से पूरे मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। यहां तक कि गर्भगृह में भी 8 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इसके अलावा मंदिर में 6 सुरक्षा गार्ड नियुक्त किए गए हैं और 2 पुलिस कर्मचारी तैनात रहते हैं। गर्भगृह में माता की 2 मूर्तियां हैं। जिनमें से एक महाभारतकालीन हैं, वहीं दूसरी 100-150 साल पुरानी है। इसके अलावा मंदिर में अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां अलग से हैं। उत्तर भारत का पहला माता मंदिर
पुजारी सुरेंद्र शास्त्री ने दावा किया कि पूरे विश्व में किसी देवी का मंदिर ऐसा नहीं हैं, जिसका गुबंद सोने का हो। किसी देवता का हो सकता है। उत्तरी भारत का तो प्रथम मंदिर है दर्शनिय स्थल। सोने-चांदी से जड़ा मंदिर कहीं नहीं है। श्रद्धालु यहां जो अपनी इच्छा व मंशा लेकर आते हैं, उनकी इच्छा पूरी होती है। लोग रोते बिलखते हुए आते हैं और प्रसन्न होकर जाते हैं। नवरात्रों के उपलक्ष्य में यहां बड़ा मेला लगता है। काफी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के चारों कोनों से श्रद्धालु यहां पर आते हैं। इसके अलावा नेपाल, भुटान व अमेरिका से लोग यहां पर आते हैं। पूरे पहाड़ पर कुल 52 धर्मशालाएं हैं। जिनमें निशुल्क खाने-पीने की व्यवस्था माता रानी की कृपा से हो रखी हैं। पुलिस रेड में मिले से सोने-चांदी के गहने व सामान
शिकायतकर्ता नरेश कुमार ने कहा कि 20 जून शनिवार को पुलिस ने पूर्व कर्मचारी के घर रेड की। जिसमें सोने-चांदी के आभूषण व अन्य सामान तथा सोने के बिस्किट मिले। इसके बाद उसने 22 जून को शिकायत लोहारू एसडीएम व डीसी को दी थी। डीसी ने इस मामले में की जांच एडीसी को सौंपी। जिसमें एडीसी ने सभी पक्षों को 23 जून को बुलाया। लेकिन आरोपी नहीं पहुंचा। इसलिए 30 जून का समय दिया गया है और सभी पक्षकारों को बुलाया है। 2010-11 में लगा था बतौर कर्मचारी
नरेश कुमार ने बताया कि पहाड़ी माता मंदिर में वर्ष 2009 में धारा 145 लगाकर संचालन प्रशासन ने अपने अधीन लिया था। यह फैसला पंचायत व मंदिर कमेटी में विवाद के बाद लिया गया था। उसने आरोप लगाया कि उक्त पूर्व कर्मचारी वर्ष 2010-11 में मंदिर में बतौर सफाई कर्मचारी लगा। इसके बाद वह वर्ष 2017 तक रहा। इसके बाद उक्त कर्मचारी को हटा दिया। वहीं बाद में वह 2020-2021 में सीसीटीवी के कंट्रोल रूम का इंचार्ज के रूप में लगा। वहीं बाद में मंदिर का सुपरवाइजर भी बन गया। वहीं अब तीन-चार महीने से भारमुक्त किया हुआ है। यह था मामला
प्रसिद्ध महाभारतकालीन पहाड़ी माता मंदिर के एक पूर्व कर्मचारी के घर से 13 तोले सोना और डेढ़ किलो चांदी बरामद हुई है। 17 साल से इस मंदिर का संचालन प्रशासन के पास है। मामले की शिकायत एक ग्रामीण नरेश ने डीसी से की थी, जिसकी जांच अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) द्वारा की जा रही है। शिकायतकर्ता नरेश कुमार पहाड़ी ने आरोप लगाया कि इस प्रकरण को उठाने के बाद उन पर मामले को दबाने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है। कुछ लोग फोन कॉल और व्यक्तिगत मुलाकातों के माध्यम से उन्हें मामले से पीछे हटने के लिए कह रहे हैं। उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और सुरक्षा उपलब्ध करवाने की मांग की। लोहारू थाना प्रभारी मुरारी लाल ने बताया कि आरोपी आशीष के घर से करीब 13 तोले सोना और करीब डेढ़ किलो चांदी मिली है। गुंबद में 52 किलो सोना लगा
पुजारी सुरेंद्र शास्त्री के मुताबिक, यह मंदिर मां सती का शक्ति स्वरूप शक्ति पीठ है। 400 फीट ऊंची पहाड़ी पर बने मंदिर के गुंबद में करीब 52 किलो सोना लगा हुआ है। मंदिर की दीवारें, छत, दरवाजे आदि पर भी सोने और चांदी लगी हुई है, जो इसकी भव्यता को दर्शाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार मां सती का शक्ति स्वरूप शक्ति पीठ है। इस पहाड़ी पर माता सती की नथ गिरी थी, जिसके बाद में इस पवित्र स्थान को पहाड़ी माता के नाम से पूजा जाने लगा। दिल्ली के तोमर वंश के राजा भी माता के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आते थे। पहाड़ी माता मंदिर के पुजारी सुरेंद्र शास्त्री के मुताबिक, मंदिर करीब 6000 वर्ष पुराना बताया जाता है। यह गांव जिला हेड क्वार्टर भिवानी से 57 किलोमीटर दूर लोहारू हलके में स्थित है। नवरात्रों में देश विदेश से यहां श्रद्धालु आते हैं।



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