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सोनीपत में सरपंच दीपक शर्मा को नहीं मिली राहत:रोहतक कमिश्नर ने बरकरार रखा पद से हटाने का आदेश; 4.63 लाख के सोलर-लाइट घोटाला




सोनीपत जिले के गांव शहजादपुर के निर्वाचित सरपंच दीपक शर्मा को पद से हटाने के डीसी के आदेश पर रोहतक मंडल आयुक्त ने भी मुहर लगा दी है। हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-51 के तहत दायर अपील पर सुनवाई करते हुए आयुक्त मोनिका मलिक (भा.प्र.से.) ने 24 जुलाई 2026 को फैसला सुनाया। आदेश में कहा गया कि सोनीपत डीसी द्वारा 19 मार्च 2026 को पारित आदेश विधिसम्मत, कारणयुक्त और उपलब्ध साक्ष्यों पर आधारित है। इसलिए सरपंच को हटाने का आदेश यथावत रखा जाता है और दीपक शर्मा की अपील खारिज की जाती है। अपील में सरपंच ने क्या-क्या दलीलें दीं सरपंच दीपक शर्मा की ओर से एडवोकेट सुरेंद्र मलिक ने तर्क दिया कि उनके खिलाफ कृष्ण कुमार द्वारा झूठी शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में नई एलईडी लाइटें लगाने में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया, जबकि वास्तव में ग्राम पंचायत ने एफएफसी योजना के तहत प्रस्ताव पारित कर 92 सौर लाइटों की मरम्मत करवाई थी। इसके लिए कोई नई लाइट नहीं खरीदी गई और पंचायत का एक भी रुपया नुकसान नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि मरम्मत के बाद अधिकांश लाइटें ठीक चल रही थीं, लेकिन बाद में कुछ लाइटें बंदरों, तूफान और अज्ञात शरारती तत्वों द्वारा क्षतिग्रस्त कर दी गईं, जिसकी शिकायत पुलिस में भी दर्ज कराई गई थी। तकनीकी स्वीकृति जरूरी नहीं होने का किया दावा अपीलकर्ता ने दलील दी कि पंचायत विभाग के 24 जून 2023 के पत्र के अनुसार ग्राम पंचायत को सौर लाइटों की मरम्मत कराने के लिए अलग से तकनीकी स्वीकृति लेने की आवश्यकता नहीं थी। पंचायत ने प्रतिस्पर्धी कोटेशन मंगवाकर और ग्राम सभा का प्रस्ताव पारित कर नियमानुसार कार्य कराया था। साथ ही जांच अतिरिक्त उपायुक्त ने की, जबकि मामला तकनीकी प्रकृति का था और इसकी जांच किसी तकनीकी विशेषज्ञ से कराई जानी चाहिए थी। शिकायतकर्ता ने भुगतान और कार्य पर उठाए सवाल प्रतिवादी कृष्ण कुमार की ओर से एडवोकेट सुमित शर्मा ने कहा कि 25 अक्टूबर 2024 को शिकायत दी गई थी, जिसके बाद जांच कमेटी गठित हुई और जांच रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार की 9 मई 2023 की अधिसूचना के अनुसार सरपंच अपने स्तर पर केवल 2.50 लाख रुपए तक के कार्य करवा सकता है, जबकि इस मामले में 4.63 लाख रुपए का भुगतान बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के किया गया। जांच में 92 सोलर लाइटों के बजाय मौके पर केवल 60 लाइटें मिलीं और उनमें से भी कई पहले से ठीक थीं। चोरी की कहानी भी पुलिस जांच में सही नहीं पाई गई। आयुक्त ने जांच प्रक्रिया को माना निष्पक्ष आयुक्त मोनिका मलिक ने अपने आदेश में कहा कि जांच के प्रत्येक चरण में अपीलकर्ता को पर्याप्त अवसर दिया गया। उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई, लिखित जवाब और साक्ष्य प्रस्तुत करने का पूरा मौका मिला। इसलिए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पूर्ण पालन किया गया। 4.63 लाख रुपए के भुगतान पर जताई आपत्ति आयुक्त ने आदेश में उल्लेख किया कि पंचायत निधि से 92 सोलर लाइटों की मरम्मत के नाम पर 4.63 लाख रुपए निकाले गए, जबकि जांच में अधिकांश कार्य मौके पर निष्पादित नहीं पाया गया। साथ ही आवश्यक तकनीकी सत्यापन और तकनीकी स्वीकृति के बिना भुगतान किया गया। आयुक्त का अंतिम फैसला आयुक्त ने कहा कि अपीलकर्ता द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण और दस्तावेज जांच रिपोर्ट के ठोस निष्कर्षों का खंडन नहीं कर सके। इसलिए उपायुक्त सोनीपत का 19 मार्च 2026 का आदेश पूरी तरह वैध, तर्कसंगत और साक्ष्यों पर आधारित है। इसी आधार पर दीपक शर्मा की अपील को निराधार और बलहीन मानते हुए खारिज कर दिया गया और उन्हें सरपंच पद से हटाने का आदेश यथावत रखा गया।



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