हरियाणा कांग्रेस कमेटी की ओर से सोनीपत नगर निगम पार्षद पद के उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही पार्टी में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। पहले मेयर पद के प्रत्याशी कमल दीवान ने चुनाव लड़ने से इनकार कर हलचल मचा दी। हालांकि, गुरुवार शाम तक पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें मनाते हुए दो पार्षदों के टिकट काट दिए। अब शुक्रवार को कई और नेताओं की नाराजगी फूट पड़ी। जहां एक ओर वार्ड-5 की दावेदारी करने वाली संतोष कादियान ने पार्टी छोड़ निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया है, वहीं सैलजा गुट से जुड़े व वर्तमान जिला महामंत्री सतबीर निर्माण ने भी कह दिया है कि वह अपने बेटे को आजाद कैंडिडेट के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला शाम तक करेंगे। उधर, टिकट कटने पर पूर्व डिप्टी मेयर मंजीत गहलावत भी खासे नाराज है। उन्होंने कहा कि कमल दीवान के दबाव में टिकट काटी गई है। यह खींचतान अब सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक दिखाई दे रही है। कहा जा रहा है कि कमल दीवान के चुनाव न लड़ने की बात पर ही पूर्व विधायक के चेहते लोगों के नाम कटवाए गए हैं। संतोष कादियान ने देर शाम एक मीडिया ग्रुप में मेयर प्रत्याशी कमल दीवान को “हारने और बिकने वाला प्रत्याशी”, जबकि पूर्व विधायक सुरेंद्र पवार को “खलनायक” बता दिया। कांग्रेस की ओर से जारी पार्षद प्रत्याशियों की लिस्ट… पहले संतोष कादियान के नाराज होने की 3 वजह… अब सतबीर निर्माण की खुली बगावत की वजह… पूर्व डिप्टी मेयर बोले- हाईकमान ने कमल दीवान की बात मान ली उधर, गुरुवार को जारी हुई पार्षद प्रत्याशियों की पहली लिस्ट में कई बड़े नामों को भी झटका लगा है। इनमें पूर्व डिप्टी मेयर मनजीत गहलावत, वार्ड-16 से संजय टोंक और वार्ड-4 से पवन गर्ग का नाम शामिल है।
मनजीत गहलावत का कहना है कि उनकी टिकट पहले से तय थी, क्योंकि वे मजबूत उम्मीदवार थे। मगर, पिछले कुछ दिनों से जिला अध्यक्ष कमल दीवान द्वारा टिकटों को लेकर विवाद खड़ा किया था। उनका आरोप है कि कमल दीवान के दबाव में टिकट काटी गई है। यह भी कहा कि कमल दीवान द्वारा मेयर चुनाव न लड़ने के फैसले के बाद पार्टी हाईकमान ने उनकी बात मान ली और उसी आधार पर टिकटों में बदलाव किया गया। सुरेंद्र पंवार गुट के नामों पर भी असर पूर्व डिप्टी मेयर मंजीत गहलावत ने आगे कहा कि पूर्व विधायक सुरेंद्र पवार द्वारा पार्षद उम्मीदवारों के लिए भेजे गए कई नामों को अंतिम सूची में जगह नहीं मिली। इससे उनके समर्थकों में भी नाराजगी देखी जा रही है।
बताया जा रहा है कि कमल दीवान के विरोध के बाद शीर्ष नेतृत्व ने टिकट वितरण में बदलाव किया, जिसमें उनका नाम भी शामिल हैं। लेकिन पार्टी के आदेश के साथ एक साथ खड़े हैं। टिकट काटने के पीछे क्या है वजह, जिलाध्यक्ष ने बताई ग्राउंड लेवल सर्वे के आधार पर दिए गए टिकट
वहीं, टिकट कटवाने के आरोपों पर जिला अध्यक्ष और मेयर प्रत्याशी कमल दीवान का कहना है कि टिकट वितरण पूरी तरह से ग्राउंड लेवल सर्वे और उम्मीदवारों की काबिलियत के आधार पर किया गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने जिताऊ उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है। पार्टी हाईकमान की ओर से ही अंतिम निर्णय लिया गया है। अनुशासनात्मक कार्रवाई और भीतरघात का असर उधर, कुछ कांग्रेसियों का कहना है कि उपचुनाव में भीतरघात करने वाले दो पार्षदों की टिकट अनुशासनात्मक समिति की रिपोर्ट के आधार पर काटी गई है। इससे प्रभावित नेता एक बार फिर बगावती रुख में नजर आ रहे हैं। यह निर्णय पार्टी के अंदर अनुशासन बनाए रखने के लिए लिया गया, लेकिन इससे असंतोष और बढ़ गया है। चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए चुनौती सोनीपत में कांग्रेस की यह अंदरूनी खींचतान चुनाव से पहले पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। टिकट कटने से नाराज नेता यदि निर्दलीय चुनाव लड़ते हैं या खुलकर विरोध करते हैं, तो इसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है। फिलहाल कांग्रेस में मची यह कलह यह संकेत दे रही है कि संगठन के भीतर एकजुटता की कमी चुनावी रणनीति पर भारी पड़ सकती है।
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सोनीपत कांग्रेस में टिकट बंटवारे पर बवाल:2 नेताओं ने पार्टी से दूरी बनाई, पूर्व डिप्टी मेयर भी सामने आए; संतोष बोलीं- कमल बिकने वाला प्रत्याशी
