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लोहारू बार एसोसिएशन के अधिवक्ता और फोरेंसिक साइंस कंसलटेंट धर्मेंद्र कुमार बोदलिया ने कहा है कि साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में साइबर ठगी, ऑनलाइन धोखाधड़ी और डिजिटल ब्लैकमेलिंग जैसे मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। बोदलिया ने जोर दिया कि ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई न होने से पीड़ितों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों में समय सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शिकायत मिलते ही संबंधित विभाग और साइबर सेल को तत्काल जांच शुरू कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। इससे अपराधियों तक शीघ्र पहुंच बनाई जा सकेगी और पीड़ितों को जल्द राहत मिल सकेगी। बोदलिया के अनुसार, शुरुआती कार्रवाई से कई मामलों में ठगी गई राशि को भी वापस दिलाने की संभावना बढ़ जाती है। शिकायतों की नियमित निगरानी की व्यवस्था हो : धर्मेंद्र उन्होंने सुझाव दिया कि पुलिस और साइबर सेल में प्राप्त शिकायतों की नियमित निगरानी की व्यवस्था होनी चाहिए। गंभीर मामलों के निस्तारण के लिए समय-सीमा निर्धारित कर उसका सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, आमजन को भी साइबर अपराधों के प्रति निरंतर जागरूक करना आवश्यक है, ताकि लोग ऑनलाइन ठगी का शिकार होने से बच सकें। बोदलिया ने लोगों से अपील की कि यदि किसी के साथ साइबर ठगी होती है या कोई संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि दिखाई देती है, तो बिना किसी देरी के इसकी सूचना संबंधित साइबर सेल, स्थानीय पुलिस तथा राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें। वित्तीय जानकारी साझा न करने की सलाह उन्होंने यह भी सलाह दी कि अपने बैंक खाते, एटीएम, यूपीआई, ओटीपी तथा अन्य व्यक्तिगत वित्तीय जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। साइबर सुरक्षा के लिए कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां भी बताई गईं। इनमें किसी भी अनजान लिंक, क्यूआर कोड या एपीके (APK) फाइल पर क्लिक न करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम पिन, सीवीवी और बैंक पासवर्ड किसी के साथ साझा न करने की भी विशेष हिदायत दी गई है।
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