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रोहतक में ऑटो गर्ल निहारिका मलिक के पिता सतेंद्र मलिक ने कहा कि सरकार बच्चों का भविष्य बनाने के लए बनती है, ना कि बच्चों का भविष्य बिगाड़ने के लिए। बच्चों का अधिकार है कि वह अपनी बात को रखे और समस्याओं का समाधान करने के लिए आवाज उठाए। लेकिन उनके ऊपर लाठीचार्ज करना, उनकी आवाज दबाना गलत है। निहारिका मलिक के पिता सतेंद्र मलिक ने कहा कि जंतर मंतर पर चार दिन रहा और युवाओं के आंदोलन को देखा। बच्चों में काफी जोश देखा और बच्चों को देखकर उनके अंदर भी एक जोश आ गया। कल को अगर कानून बदलता है तो वह उनके बच्चों के भी काम आएगा। जंतर मंतर के दौरान ही सोशल मीडिया पर बेटी का पहली बार वीडियो देखा। पीएम को गाली देने वालों को मिल रही धमकी
सतेंद्र मलिक ने बताया कि उनके पास अभी तक कोई धमकी भरा कॉल नहीं आया है। जिन लोगों ने प्रधानमंत्री को लेकर गाली गलौच की, उन्हें धमकी मिल रही है। क्योंकि प्रधानमंत्री को गाली देना सही नहीं है। विरोध प्रकट करने का एक तरीका होता है। गाली नहीं देनी चाहिए। आंदोलन को समर्थन करने वालों को पकड़ना गलत
सतेंद्र मलिक ने कहा कि आंदोलन करने वाले युवाओं का समर्थन करने वाले लोगों को पुलिस पकड़ रही है, जो गलत है। सत्ता का काम बच्चों का ध्यान रखना होता है, लेकिन यहां तो ध्यान रखने की बजाय उन्हें उठाकर जेलों में डाला जा रहा है। जब ये बच्चे बाहर आएंगे तो क्या बनेंगे। क्या सरकार इन्हें अपराधी बनाना चाहती है या इन बच्चों से आत्महत्या करवाना चाहती है। जंतर मंतर पर नहीं लगा कि कोई राजनीति हुई
सतेंद्र मलिक ने कहा कि जंतर मंतर पर जाने का उद्देश्य यही था कि कल को मेरी दो बेटियां भी परीक्षा देंगी। अगर प्रदर्शन के बाद एजुकेशन सिस्टम में कुछ बदलाव होता है तो उसका फायदा उनकी बेटियों को भी मिलेगा। वहां बच्चों में काफी जोश था और एक पल के लिए भी नहीं लगा कि कोई राजनीति वहां हो रही थी। इंस्टाग्राम ने प्रोटेस्ट को अंजाम तक पहुंचाया
सतेंद्र मलिक ने कहा कि बच्चों की आवाज को कभी दबाना नहीं चाहिए। निहारिका ने नीट का एग्जाम नहीं दिया, लेकिन न्यूज व इंस्टाग्राम पर रील देख रही थी कि क्या हो रहा है। इंस्टाग्राम के माध्यम से ही तो प्रोटेस्ट अंजाम तक पहुंचा है। जो लोग इंस्टाग्राम पर अच्छी चीज देखना चाहते हैं, उन्हें अच्छा ही दिखेगा। बच्चों को दबने की बजाय बोलना सिखाएं
सतेंद्र मलिक ने कहा कि अपने बच्चों को दबने की बजाय बोलना सिखाए। बच्चों को अपना अधिकार मांगने का पूरा हक है। अगर बच्चे गलत करें तो उन्हें डांटना भी चाहिए, लेकिन अच्छा करने पर उन्हें प्रोत्साहित भी करें। बच्चे को जरूरत से अधिक डराएंगे तो वह कमजोर बन जाएगा और अपनी बात कह नहीं पाएगा।
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