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रोहतक में प्राइवेट अस्पताल में मरीज के परिजनों का हंगामा:ईलाज में लापरवाही का लगाया आरोप, बीपी बढ़ने से फटी दिमाग की नस




रोहतक के पोजीट्रोन अस्पताल में मरीज के परिजनों ने डॉक्टरों पर ईलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया और डायल 112 पर कॉल कर पुलिस को बुला लिया। मरीज के परिजनों ने अस्पताल के खिलाफ लिखित में शिकायत दी। वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि मरीज पहले से ही बीपी व शुगर का पेशेंट है, जिसके कारण दिमाग की नस फटी है। मरीज राजकुमार के बेटे दीपक ने बताया कि 14 जुलाई को वह अपने पिता को लेकर अस्पताल में आया था, जहां उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया। इसके बाद टेस्ट किए, जिसके हिसाब से ईलाज किया गया। डॉक्टरों ने डायलिसिस के बारे में कहा और दो डायलिसिस किए गए। जिस समय मरीज को लेकर आए, उस समय ठीक थे, लेकिन चार दिन में हालत खराब हो गई। 18 जुलाई को घर ले गए, 21 को दोबारा लेकर आए
दीपक ने बताया कि मरीज राजकुमार को डॉक्टरों के कहने पर 18 जुलाई को घर ले गए। डॉक्टरों ने 21 जुलाई को दोबारा बुलाया था। जब 21 जुलाई को अस्पताल में लेकर आए तो डॉक्टरों ने खून की जांच की, जिसमें कुछ कमी बताई और इंजेक्शन से ठीक होने के बारे में कहा। इसके बाद आईसीयू में भर्ती कर लिया। डायलिसिस करवाकर रात को साढे 9 बजे निकाला
दीपक ने बताया कि शाम को 5 बजे डायलिसिस शुरू की और रात 9 बजे डायलिसिस पूरी हो गई। पिता से बात करके वह रात करीब साढे 9 बजे अस्पताल से निकला। क्योंकि डॉक्टरों ने भी आज छुट्टी देने की बात कही थी। रात को 10 बजे फोन आया कि मरीज खाना खाने के बारे में बोल रहे है। मैने कहा कि जो आईसीयू में खिलाते हैं, वो आप देख लो। राजकुमार सुबह कोई हरकत नहीं करता मिला
दीपक ने बताया कि सुबह जब 9 बजे पिता राजकुमार को देखने गया तो सब ठीक था। लेकिन जब बात करने की कोशिश की तो वह कुछ नहीं बोल रहे थे। हिलाने का प्रयास किया तो वह हिल नहीं रहे थे। इसके बाद हाथ पर देखा तो पट्टी बंधी हुई थी, जिसके बारे में डॉक्टर ने कहा कि रात को बार-बार में हाथ डायलिसिस वाली जगह पर लगा रहे थे, जिसे रोकने के लिए हाथ को बांधा गया था। MRI में दिमाग की नस फटने का पता चला
दीपक ने बताया कि पिता राजकुमार का बीपी 200 की रेंज में चल रहा था। एमआरआई देखी तो पता चला कि सिर में नस फटकर खून निकल गया। बाद में सीसीटीवी चेक किया तो देखा कि पिता तड़पते रहे और किसी ने उन्हें नहीं संभाला। बीपी अधिक होने के कारण उनके दिमाग की नस फट गई। डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए, बोले-मरीज को ले जाओ
दीपक ने बताया कि अस्पताल के डॉक्टरों ने जवाब दे दिया और कहा कि हम कुछ नहीं कर सकते, आप इन्हें ले जा सकते हो। दूसरे अस्पताल के डॉक्टरों से भी बात की, जिन्होंने कहा कि डॉक्टरों की लापरवाही के कारण उनके पिता की हालत खराब हुई है। इस मामले में अर्बन एस्टेट थाने में शिकायत दी गई है। अब पिता राजकुमार डेड पोजीशन में पहुंच गए है। मरीज की पहले हो चुकी प्लास्टिक सर्जरी
पोजीट्रोन अस्पताल के डॉक्टर बिजेंद्र सिंह ने बताया कि जब 14 जुलाई को मरीज आया तो परिजनों ने बताया कि राजकुमार के पहले ही स्टैंट डले हुए है। प्लास्टिक सर्जरी के माध्यम से स्टैंट डाले गए थे। तब राजकुमार का यूरिया क्रेटमिन 6 के करीब था, छाती में दोनों तरफ पानी भरा हुआ था। सांस की दिक्कत थी। डॉ. बिजेंद्र ने बताया कि राजकुमार को डायलिसिस के बाद 18 जुलाई को स्टेबल कंडीशन में डिस्चार्ज किया गया। 21 को दोबारा बुलाया था। जब मरीज आया तो परिजनों ने बताया कि उन्हें हिचकी आ रही है और खाना कम खा रहे है। टेस्ट में पता चला कि सोडियम 117 के आसपास था और यूरिया क्रेटमिन 7 के आसपास था, जिसके बाद डायलिसिस किया गया। डायलिसिस के लिए गले में लगाया था कैथेटर
डॉ. बिजेंद्र ने बताया कि राजकुमार के गले पर एक कैथेटर लगा हुआ था, जिससे डायलिसिस करते है। रात को 10 बजे राजकुमार को देखने गए तो वह शौचालय जाना चाहता था। इसके बाद मरीज के बेटे के पास फोन किया गया। क्योंकि राजकुमार गले में लगे कैथेटर को बार-बार हाथ से छेड़ रहे थे, जिससे खून निकल सकता था। ईसीजी डिप हुई तो करवाई एमआरआई
डॉ. बिजेंद्र ने बताया कि स्टाफ ने मरीज के हाथ को एक तरफ कर दिया, ताकि वह कैथेटर को ना छेड़े। सुबह जब देखा तो 8 बजे के बाद मरीज का इसीजी डिप हो रहा था। बाद में MRI किया तो पता चला कि दिमाग की नस फटी हुई है जिससे खून निकला हुआ है। रातभर मरीज को एग्जामिन किया गया है और एक स्टाफ सदस्य लगातार बैठा हुआ था।



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