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यमुनानगर में नगर निगम के एमई पर केस दर्ज:मंत्री विज के निर्देश पर कार्रवाई; अवैध कॉलोनी में प्लॉट की फर्जी रजिस्ट्री कराई थी




यमुनानगर में अवैध कॉलोनी में स्थित एक प्लॉट की नियमों के विपरीत रजिस्ट्री कराने के आरोप में नगर निगम के तत्कालीन एमई के खिलाफ पुलिस केस दर्ज किया गया है। जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में मामला उठने और मंत्री अनिल विज के निर्देशों के बाद नगर निगम प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए अपने ही कर्मचारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। थाना यमुनानगर सिटी पुलिस ने नगर निगम के एमई दीपक सुखिजा (फिलहाल नगर परिषद कालमा में तैनात) के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, मामला एक अवैध कॉलोनी में स्थित प्लॉट की रजिस्ट्री से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित कर्मचारी ने कथित रूप से फर्जी आईडी तैयार कर सिस्टम का दुरुपयोग किया और ओटीपी हासिल कर प्लॉट की रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरा कराया। नगर निगम के असिस्टेंट टाउन प्लानर (एटीपी) की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज किया है। आधा प्लॉट वैध तो आधा अवैध बताया यह प्रकरण 28 मई को हुई जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में भी प्रमुखता से उठा था। बैठक में सेक्टर 17 निवासी महेंद्र तनेजा ने अपनी जमीन से जुड़े विवाद को रखते हुए बताया था कि उनकी संपत्ति अवैध कॉलोनी में स्थित है। उनका कहना था कि उसी भूमि के एक हिस्से की पहले रजिस्ट्री हो चुकी है, जबकि बाद में शेष हिस्से की रजिस्ट्री को कॉलोनी अवैध होने का हवाला देकर रोका जा रहा है। शिकायतकर्ता ने इस स्थिति पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। प्लॉट को रिकॉर्ड में वैध बताते हुए की रजिस्ट्री बैठक के दौरान अधिकारियों ने मामले से संबंधित प्रारंभिक तथ्यों की जानकारी मंत्री को दी थी। अधिकारियों के अनुसार जांच में सामने आया कि छुट्टी वाले दिन सिस्टम का इस्तेमाल कर एक प्लॉट को रिकॉर्ड में वैध दर्शाते हुए उसकी रजिस्ट्री कराई गई थी। वहीं रजिस्ट्री के लिए किसी दूसरी प्रॉपर्टी आईडी का इस्तेमाल किया गया। इस जानकारी पर मंत्री ने नाराजगी व्यक्त करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आरोपी की केवल ट्रांसफर करना पर्याप्त नहीं है। यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसके खिलाफ मामला दर्ज कराया जाए। मंत्री के निर्देशों के बाद नगर निगम स्तर पर मामले की जांच की गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस को शिकायत सौंपी गई, जिसके बाद एफआईआर दर्ज की गई।



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