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यमुनानगर में एक्सिडेंट केस में चार माह बाद FIR दर्ज:पीड़ित को काटने पड़े चक्कर; कोर्ट ने फटकार लगाकर दर्ज करवाया केस




यमुनानगर में एक साधारण दिखने वाला सड़क हादसा अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है। आरोप है कि साफ तौर पर संज्ञेय अपराध होने के बावजूद थाना छप्पर पुलिस ने महीनों तक एफआईआर दर्ज नहीं की और पीड़ित को शिकायत से लेकर एसपी कार्यालय तक चक्कर कटवाए जाते रहे। जब हर स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो मामला कोर्ट पहुंचा, जहां जज ने सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस को केस दर्ज करने के आदेश दिए। अदालत के आदेश के बाद आखिरकार करीब चार माह बाद मामला दर्ज हुआ। हाईवे पर काले रंग की स्कॉर्पियो गाड़ी ने मारी थी टक्कर शिकायतकर्ता विकास चौधरी निवासी ने अदालत में दायर अपनी अर्जी में बताया कि 27 दिसंबर 2025 को वह गाड़ी में चंडीगढ़ से यमुनानगर लौट रहा था। जब वह अंबाला रोड स्थित गढ़ोली/गढ़ौला मोड़ के पास पहुंचा, तभी बाईं ओर से आ रही एक काले रंग की स्कॉर्पियो गाड़ी ने बिना इंडिकेटर दिए अचानक उसकी कार की ओर मुड़ते हुए टक्कर मार दी। इस टक्कर में उसकी कार क्षतिग्रस्त हो गई, जबकि आरोपी चालक मौके से फरार हो गया और उसने कोई मदद भी नहीं की। घटना के तुरंत बाद उसने ने 112 हेल्पलाइन पर सूचना दी, जिस पर टीम मौके पर पहुंची और उसे थाना छप्पर में शिकायत देने की सलाह दी। उसी दिन उसने लिखित शिकायत भी दी, जबकि क्षतिग्रस्त वाहन को एक अन्य निजी वाहन की मदद से वहां से हटाया गया। एसपी ऑफिस के भी काटे चक्कर आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की और केवल जीडी दर्ज कर मामले को सीमित कर दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने 8 जनवरी को एसपी यमुनानगर को भी शिकायत की, लेकिन तब भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतकर्ता के अनुसार इसके बाद उसने कोर्ट का रुख किया। नोटिस भेजे जाने पर मामले में थाना छप्पर के एसएचओ/जांच अधिकारी द्वारा अदालत में जवाब दाखिल किया गया, जिसमें बताया गया कि प्रारंभिक जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल का दौरा किया और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, लेकिन आरोपी वाहन या चालक की पहचान नहीं हो सकी। कोर्ट के आदेश पर 4 माह बाद केस दर्ज पुलिस ने यह भी तर्क दिया कि घटना में किसी व्यक्ति को चोट नहीं आई, केवल वाहन को नुकसान हुआ है, इसलिए इसे संज्ञेय अपराध नहीं मानते हुए केवल जीडी एंट्री की गई। हालांकि, अदालत ने पुलिस के इस रुख को खारिज करते हुए कहा कि शिकायत के तथ्यों से बीएनएस की धारा 281 (लापरवाही से वाहन चलाना) के तहत संज्ञेय अपराध स्पष्ट रूप से बनता है। जिसके बाद एसएचओ को कोर्ट द्वारा तुरंत इस केस में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए। कोर्ट के आदेश पर अब जाकर करीब चार माह बाद अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ केस दर्ज कयिा गया है।



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