हरियाणा के कुरुक्षेत्र में भ्रूण लिंग जांच मामले में कोर्ट का फैसला सामने आया है। करीब 10 साल पुराने मामले में कोर्ट ने भ्रूण लिंग जांच करने में शामिल डॉक्टर, दलाल और लिंग जांच करवाने वाले दंपती को दोषी करार दिया। ऐसा पहली बार हुआ कि लिंग जांच करवाने वाले दंपती को भी सजा मिली है। यह मामला साल 2016 में स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए गए एक डिकॉय ऑपरेशन से जुड़ा है। विभाग को सूचना मिली थी कि उत्तर प्रदेश के बिजनौर में पैसे लेकर भ्रूण का लिंग बताया जा रहा है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने एक ग्राहक के जरिए पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की योजना बनाई। जांच के लिए 18 हजार रुपए में सौदा तय किया गया। मौके पर पकड़े गए थे आरोपी कुरुक्षेत्र के LNJP अस्पताल के डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रमेश सभ्रवाल ने बताया कि अल्ट्रासाउंड जांच करवाने के बाद टीम ने आरोपी डॉक्टर कौशल निवासी बिजनौर, दलाल संदीप कुमार निवासी लाडवा, लिंग जांच करवाकर लौट रहा दंपती रिंकू व रेखा निवासी करनाल और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों को हिरासत में लिया था। पूरे मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू की गई। विभाग ने 25 गवाह किए पेश इस मामले में पुलिस ने कुल 8 लोगों को आरोपी बनाया था। सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य विभाग की ओर से 25 गवाह पेश किए गए। लंबे ट्रायल और सबूतों की जांच के बाद अदालत ने चार आरोपी धर्मबीर, कुलदीप, रामचंद्र और दीपक को को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया, जबकि 4 आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित हो गए। डॉक्टर-दलाल को तीन-तीन साल कैद कोर्ट ने डॉक्टर कौशल और दलाल संदीप को दोषी करार देते हुए 3-3 साल की कैद सजा सुनाई। कोर्ट ने दोनों पर 5-5 हजार रुपए जुर्माना भी तय किया है। इसके अलावा लिंग जांच करवाने वाले दंपती रिंकू और रेखा को 1-1 साल की कैद तथा 1-1 हजार रुपए जुर्माने की सजा दी गई है। लिंग जांच करवाने वाले पहली बार सजा डॉ. रमेश सभ्रवाल ने बताया कि कुरुक्षेत्र में यह पहला मामला है, जिसमें केवल लिंग जांच करने वालों या उसका नेटवर्क चलाने वालों को ही नहीं, बल्कि लिंग जांच करवाने वाले दंपती को भी सजा हुई है। कोर्ट के इस फैसले ने साफ कर दिया कि भ्रूण लिंग की जांच करके बताने वाले ही नहीं, बल्कि भ्रूण का लिंग पूछना भी अपराध है।
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