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अमृतसर के पिंगलवाड़ा के संस्थापक और समाजसेवी भगत पूरन सिंह को मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की मांग उठी है। राज्यसभा सांसद डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी ने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर भगत पूरन सिंह को भारत रत्न देने की मांग की है। 10 अगस्त 2026 को लिखे पत्र में सांसद साहनी ने भगत पूरन सिंह के समाज और पर्यावरण के क्षेत्र में किए गए योगदान का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि भगत पूरन सिंह महान पर्यावरणविद्, समाजसेवी और मानवता की सेवा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले व्यक्तित्व थे। उन्होंने वर्ष 1947 में पिंगलवाड़ा की स्थापना की, जहां बेसहारा, बीमार, दिव्यांग और समाज द्वारा उपेक्षित लोगों को आश्रय और देखभाल मिलती रही है। सांसद के मुताबिक, भगत पूरन सिंह का अपना कोई स्थायी घर नहीं था और उन्होंने अपना पूरा जीवन गरीब, बेसहारा, बीमार और दिव्यांग लोगों की सेवा में लगा दिया। पिंगलवाड़ा में बच्चों, विधवाओं, बुजुर्गों और दिव्यांग लोगों को एक परिवार जैसा माहौल और अपनापन देने का काम किया गया। भगत पूरन सिंह केवल समाजसेवा तक सीमित नहीं रहे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी लगातार सक्रिय रहे। उन्होंने पौधारोपण अभियान चलाए और पर्यावरण से जुड़े गंभीर मुद्दों पर किताबें और पर्चे लिखकर लोगों को जागरूक किया। उनकी समाजसेवा और मानवता के प्रति योगदान को देखते हुए वर्ष 1981 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। हालांकि, स्वर्ण मंदिर पर भारतीय सेना की कार्रवाई के बाद उन्होंने पद्मश्री सम्मान वापस कर दिया था। राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने अपने पत्र में कहा है कि भगत पूरन सिंह के जीवन और मानवता के प्रति उनके योगदान को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित करना बेहद उचित होगा। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मांग पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है।
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