spot_imgspot_img

Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

कैफे को 52.50 रुपए सर्विस चार्ज लगाना पड़ा महंगा:उपभोक्ता आयोग ने कैफे एलिजाबेथ-3 को ठोका जुर्माना,30 दिन में देना मुआवजा




लुधियाना में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कैफे एलिजाबेथ-3 द्वारा ग्राहक के बिल में कथित तौर पर जबरन सर्विस चार्ज जोड़ने को अनुचित व्यापार व्यवहार माना है। आयोग ने कैफे को ग्राहक से लिए गए 52.50 रुपए सर्विस चार्ज 8 प्रतिशत सालाना ब्याज समेत लौटाने और 10 हजार रुपए संयुक्त मुआवजे व मुकदमा खर्च के तौर पर भुगतान करने का आदेश दिया है। कैफे को आदेश मिलने के 30 दिन के भीतर इसका पालन करना होगा। यह आदेश आयोग के अध्यक्ष संजीव बत्रा और सदस्य मोनिका भगत की पीठ ने हैबोवाल कलां निवासी रिषभ गुप्ता की शिकायत पर सुनाया। दोस्तों के साथ कैफे पहुंचे थे, बिल में जुड़ा 5% सर्विस चार्ज शिकायत के अनुसार, रिषभ गुप्ता 24 जनवरी 2026 को अपने दोस्तों के साथ कैफे एलिजाबेथ-3 गए थे। उन्होंने एक पिज्जा और डाइट कोक का कैन ऑर्डर किया। शिकायतकर्ता का आरोप था कि डाइट कोक का कैन बंद हालत में ही दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद कैफे ने बिल में 5 प्रतिशत यानी 52.50 रुपए सर्विस चार्ज जोड़ दिया। सर्विस चार्ज के अलावा बिल में GST भी लगाया गया, जिससे कुल बिल 1,155 रुपए हो गया। आपत्ति जताने पर कहा-यह हमारी सामान्य प्रक्रिया है
रिषभ गुप्ता ने बिल में सर्विस चार्ज लगाए जाने पर कैफे के प्रतिनिधि के सामने आपत्ति जताई। शिकायत के मुताबिक, उन्हें बताया गया कि सर्विस चार्ज लेना कैफे की सामान्य प्रक्रिया है। ग्राहक ने रकम का भुगतान कर दिया, लेकिन बाद में कैफे को कानूनी नोटिस भेजकर सर्विस चार्ज वापस करने की मांग की। शिकायतकर्ता के अनुसार, नोटिस भेजने के बावजूद उसे कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। नोटिस के बावजूद कैफे आयोग में पेश नहीं हुआ
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से कैफे को नोटिस जारी किया गया, लेकिन कैफे की ओर से कोई पेश नहीं हुआ। इसके बाद आयोग ने कैफे के खिलाफ एकतरफा (Ex Parte) कार्यवाही की और उपलब्ध रिकॉर्ड व शिकायत के आधार पर मामले का फैसला किया। CCPA की गाइडलाइन का दिया हवाला
आयोग ने अपने आदेश में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA)की वर्ष 2022 की गाइडलाइन का हवाला दिया। इसमें कहा गया है कि रेस्टोरेंट और कैफे बिल में डिफॉल्ट या स्वत: सर्विस चार्ज नहीं जोड़ सकते। आयोग ने मार्च 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें CCPA की इन गाइडलाइंस को बरकरार रखा गया था। अदालत ने माना था कि सर्विस चार्ज स्वैच्छिक है और ग्राहक पर इसे जबरन लागू नहीं किया जा सकता। बिल में अलग से सर्विस चार्ज लिखा, लेकिन पहले से जानकारी नहीं दी
आयोग ने पाया कि विवादित बिल में सर्विस चार्ज के नाम से अलग एंट्री मौजूद थी। हालांकि, आयोग के अनुसार कैफे की ओर से बिल पर इसे प्रमुखता से प्रदर्शित नहीं किया गया था और न ही रेस्टोरेंट में कहीं ऐसी जानकारी प्रमुख रूप से प्रदर्शित होने की बात सामने आई, जिससे ग्राहक को पहले से पता चलता कि उससे सर्विस चार्ज लिया जाएगा। आयोग ने इसे उपभोक्ता के जानकारी पाने के अधिकार का उल्लंघन माना। ग्राहक भुगतान किए बिना निकलने की स्थिति नहीं था-आयोग
आयोग ने यह भी माना कि ग्राहक को कैफे से बाहर निकलने से पहले विवादित सर्विस चार्ज का भुगतान करने के लिए मजबूर होना पड़ा। आयोग के अनुसार, यह प्रथा उस समय लागू CCPA की गाइडलाइंस के विपरीत थी। 52.50 रुपए पर 8% ब्याज, 10 हजार रुपए मुआवजा
आयोग ने कैफे को निर्देश दिया कि वह ग्राहक से लिया गया 52.50 रुपए सर्विस चार्ज 24 जनवरी 2026 से भुगतान होने तक 8 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ वापस करे।
इसके अलावा कैफे को 10 हजार रुपए संयुक्त मुआवजा और मुकदमा खर्च के तौर पर भी भुगतान करना होगा। बिलिंग सॉफ्टवेयर से डिफॉल्ट सर्विस चार्ज हटाना होगा
आयोग ने कैफे को केवल रकम वापस करने का आदेश ही नहीं दिया, बल्कि अपनी सॉफ्टवेयर आधारित बिलिंग व्यवस्था में बदलाव करने को भी कहा है। कैफे को बिलिंग सॉफ्टवेयर से सर्विस चार्ज को डिफॉल्ट रूप से जोड़ने की व्यवस्था हटानी होगी। किसी दूसरे नाम से इस तरह का अनिवार्य चार्ज जोड़ने पर भी रोक रहेगी। आयोग ने कैफे को आदेश प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर सभी निर्देशों का पालन करने को कहा है।



Source link

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Popular Articles