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करनाल में घरौंडा विधानसभा के गांव कालरम का राजकीय उच्च विद्यालय पिछले 3 साल से कमरों जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जूझ रहा है। वर्ष 2023 में जनसंवाद कार्यक्रम में मुद्दा उठा और उसके बाद स्कूल ने प्रस्ताव भेजा, जिसके आधार पर करीब 3 करोड़ 8 लाख रुपये का एस्टीमेट तैयार हुआ। वर्ष 2024 में हेड ऑफिस ने लगभग 299 लाख रुपये का बजट भी स्वीकृत कर दिया, लेकिन इसके बावजूद आज तक स्कूल भवन का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। हालात यह हैं कि बच्चों को एक-एक कमरे में दो-दो कक्षाओं में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कमरे कम, बच्चों पर बढ़ता दबाव
गांव के ग्रामीण तेजपाल, नकल सिंह, मनोज कुमार व अन्य ने बताया कि तीन साल पहले स्कूल की पुरानी बिल्डिंग को तोड़ दिया गया था। उस समय कहा गया था कि यहां 10 नए कमरे, स्टेज और शौचालय जैसी सुविधाएं बनाई जाएंगी और करीब 10 महीने में निर्माण पूरा हो जाएगा। लेकिन आज तक न तो निर्माण शुरू हुआ और न ही बजट धरातल पर दिखाई दिया। वर्तमान में प्राइमरी और हाई स्कूल के बच्चों को एक ही भवन में समायोजित किया गया है, जहां एक कमरे में दो-दो कक्षाएं लगती हैं। कई कमरे स्टोर रूम जैसे नजर आते हैं, जिससे बच्चों को बैठने तक की उचित व्यवस्था नहीं मिल पा रही। ग्रामीणों का कहना है कि जहां पहले कमरे थे, वहां अब केवल खाली जमीन और घास नजर आती है। बच्चों को मजबूरी में तंग जगहों पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में पहले ही कम लोग बच्चों को भेजते हैं, लेकिन जो भेजते हैं उनके बच्चों के लिए भी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। पंचायत की मांग: हमें दी जाए अनुमति
गांव के सरपंच प्रतिनिधि दीपेंद्र राणा ने बताया कि स्कूल के निर्माण के लिए एजुकेशन डिपार्टमेंट की ओर से पत्र आया था, जिसमें 10 कमरे बनाने की बात कही गई थी। बजट भी स्वीकृत हो चुका है, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि प्राइमरी विंग के पास अब एक भी अपना कमरा नहीं है, सभी पुराने कमरे तोड़ दिए गए थे। ऐसे में बच्चों को हाई स्कूल की बिल्डिंग में एडजस्ट करना पड़ रहा है। शिक्षा मंत्री, विधायक और शिक्षा विभाग
दीपेंद्र राणा ने कहा कि पंचायत ने इस मामले को लेकर कई बार स्थानीय विधायक और शिक्षा मंत्री से मुलाकात की है। चार बार शिक्षा मंत्री से मिलने के अलावा दो बार शिक्षा निदेशालय भी गए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सरकार से मांग की कि यदि विभाग निर्माण नहीं करवा सकता, तो पंचायत को एनओसी दी जाए ताकि ग्रामीणों के सहयोग से कमरों का निर्माण कराया जा सके। अधिकारियों के दावे: प्रक्रिया हेड ऑफिस स्तर पर
एसएसए विंग के जूनियर इंजीनियर निशांत राणा ने बताया कि वर्ष 2023 में जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान स्कूल का प्रस्ताव आया था। इसके आधार पर 3 करोड़ 8 लाख का एस्टीमेट बनाकर भेजा गया और 2024 में करीब 299 लाख रुपये का बजट स्वीकृत भी हो गया। उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया हेड ऑफिस स्तर पर होती है और बजट स्वीकृति का पत्र भी मिल चुका है। निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय घरौंडा की ओर से दो बार रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं। क्या कहती है खंड शिक्षा अधिकारी
घरौंडा की खंड शिक्षा अधिकारी वीना देवी ने भी पुष्टि की कि स्कूल के लिए बजट स्वीकृत है और विभागीय स्तर पर सभी जरूरी दस्तावेज भेजे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि टेंडरिंग प्रक्रिया हेड ऑफिस स्तर पर लंबित है और हमारे द्वारा समय-समय पर रिमाइंडर भेजे जा रहे हैं। हाल ही में भी स्कूल से संबंधित पूरा पत्र तैयार कर भेजा गया है। सवालों के घेरे में सिस्टम
तीन साल का लंबा समय बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू न होना शिक्षा विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बजट स्वीकृत होने के बावजूद अगर निर्माण नहीं होता, तो इसका सीधा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ता है। अब गांव के लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द ही इस समस्या का समाधान होगा, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा माहौल मिल सके।
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