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आमतौर पर किसी व्यक्ति के निधन के बाद ब्रह्मभोज आयोजित किया जाता है, लेकिन फतेहाबाद के भट्टू कलां में एक परिवार ने इस परंपरा को अलग मायने दे दिए। यहां 80 वर्षीय खजानी देवी के जीवित रहते हुए ही उनके सम्मान में ब्रह्मभोज आयोजित किया गया। परिवार ने हरियाणा और राजस्थान से अपने रिश्तेदारों और परिचितों को निमंत्रण भेजा। मेहमानों को जलेबी और भोजन खिलाने के साथ-साथ विदाई में तीन-तीन किलो लड्डू भी भेंट किए गए। पूरे आयोजन पर करीब आठ से नौ लाख रुपए खर्च किए गए। परिवार का कहना है कि यह उनके समाज की पुरानी परंपरा है। उनका मानना है कि किसी बुजुर्ग के निधन के बाद किए जाने वाले सम्मान और खर्च को वह स्वयं नहीं देख पाता। इसलिए उन्होंने तय किया कि मां के रहते हुए ही उनका सम्मान किया जाए, ताकि वह अपनी आंखों से देख सकें कि परिवार उनके प्रति कितना आदर और प्रेम रखता है। आठ बेटे-बेटियों का परिवार हुआ शामिल यह कार्यक्रम भट्टू कलां निवासी खजानी देवी के परिवार ने किया। खजानी देवी के आठ बेटे-बेटियां हैं। इनमें बेटे सुंदर, हनुमान, गुलाब, छोटूराम और सुभाष जबकि बेटियां धर्मा देवी, लाली देवी और भानी देवी हैं। बेटी लाली देवी और छोटे बेटे सुभाष का निधन हो चुका है। परिवार कई पीढ़ियों से लोहे के औजार बनाने का काम करता है। राजस्थान से भी पहुंचे रिश्तेदार ब्रह्मभोज में हरियाणा के फतेहाबाद जिले के भट्टू, रतिया, पारता, सिरसा जिले के गांव बाजेकां, हिसार, मंगाली और राजस्थान के नोहर, मुंसरी, मिराण समेत कई जगहों से रिश्तेदार आए। परिवार के सदस्यों का कहना है कि माता-पिता का सम्मान केवल उनके जाने के बाद नहीं, बल्कि उनके जीते जी होना चाहिए। उनका मानना है कि सबसे बड़ा सुख यही है कि बुजुर्ग अपने सम्मान और परिवार के प्रेम को अपनी आंखों से देख सकें। गांव में यह आयोजन चर्चा का विषय बना रहा। बड़ी संख्या में लोग परिवार के इस आयोजन में शामिल हुए। 13 पोते-पोतियां और 11 दोहते-दोहतियां खजानी देवी के बेटे छोटूराम ने बताया कि उनकी मां इस उम्र में भी एकदम स्वस्थ हैं। वह अपना सारा कामकाज खुद करती हैं। पानी की टोकनी भरकर भी ले आती हैं। उनके 13 पोते-पोतियां और 11 दोहते-दोहतियां हैं।
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फतेहाबाद में जीते जी मां का किया ब्रह्मभोज:हरियाणा-राजस्थान से पहुंचे रिश्तेदार; तीन-तीन किलो लड्डू भी बांटे







