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प्राइवेट स्कूलों की फीस पर कार्रवाई का अधिकार राज्य को:लोकसभा में केंद्र का जवाब, DEO और FRC को कर सकते है शिकायत




प्राइवेट स्कूलों में मनमानी फीस बढ़ोतरी रोकने, फीस को रेगुलेट करने और स्कूलों पर कार्रवाई करने का मुख्य अधिकार राज्य सरकारों के पास है। चाहे स्कूल CBSE से जुड़ा ही क्यों न हों। यह जानकारी केंद्र सरकार ने लोकसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राज कुमार चब्बेवाल के सवाल के जवाब में दी है। वहीं, यदि किसी अभिभावक को स्कूल से जुड़ी कोई शिकायत है, तो उन्हें जिला शिक्षा अधिकारी , राज्य की फीस रेगुलेटरी कमेटी या CBSE के आधिकारिक शिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकता है। अभी कुछ दिन पहले ही पंजाब सरकार ने प्राइवेट स्कूलों की फीस को लेकर नियम बनाए हैं। पंजाब में 5% फीस ही स्कूल बढ़ा सकते हैं। हालांकि स्कूल इस आदेश के खिलाफ पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंच गए हैं। अब 4 प्वाइंट में जानिए केंद्र का स्कूलों को लेकर क्या कहना है : 1. फीस तय करने का अधिकार राज्यों को
संविधान में शिक्षा समवर्ती सूची का हिस्सा है। इसलिए केंद्र के अधीन न आने वाले सभी प्राइवेट स्कूलों की फीस तय करने, नियम बनाने और उनके संचालन को नियंत्रित करने का पूरा अधिकार राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास है। 2. फीस रेगुलेटरी कमेटी और नियम तय करना
प्राइवेट स्कूल अपनी मनमर्जी से फीस न बढ़ा सकें, इसके लिए राज्य सरकारें अपने स्तर पर फीस रेगुलेटरी कमेटी (FRC) बनाती हैं और फीस की जांच के नियम तय करती हैं। कई राज्य यह व्यवस्था पहले ही लागू कर चुके हैं। 3. नियमों के उल्लंघन पर सीधी कार्रवाई
यदि कोई निजी स्कूल तय मानकों से अधिक फीस वसूलता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसकी मान्यता रद्द करने या उस पर जुर्माना लगाने का अधिकार राज्य के शिक्षा विभाग के पास होता है। 4. RTE के तहत 25% आरक्षण लागू कराना
RTE एक्ट की धारा 12(1)(c) के तहत प्राइवेट अनएडेड स्कूलों में प्रवेश स्तर की 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है। इसे लागू कराना और इसकी निगरानी करना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। CBSE स्कूलों के लिए यह हैं नियम मनमर्जी से फीस नहीं बढ़ा सकते
स्कूल अपनी मर्जी से फीस नहीं बढ़ा सकते। फीस बढ़ाने के लिए तय नियमों का पालन करना और आवश्यक मंजूरी लेना अनिवार्य है। स्कूल में किताबें-यूनिफॉर्म बेचने पर रोक
स्कूल किसी एक तय दुकान से किताबें, यूनिफॉर्म या जूते खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर नहीं कर सकते। इससे अभिभावक अपनी पसंद की दुकान से सामान खरीद सकते हैं।



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