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पठानकोट जिले के कंडी क्षेत्र धार कलां में किसानों और राजस्व विभाग के बीच जमीनी हकूक को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। किसान संघर्ष कमेटी धार कलां की ओर से गांव बुंगल में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक कमेटी के उपाध्यक्ष जगजीत सिंह और सचिव किशन चंद गोस्वामी की साझी अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें धार ब्लॉक के दर्जनों गांवों से मौजूदा सरपंचों, पूर्व सरपंचों, पंचों, पूर्व पंचों, नंबरदारों तथा सैकड़ों पीड़ित किसानों ने भाग लिया। बैठक में राजस्व विभाग द्वारा धार कलां तहसील के अंतर्गत आने वाली 27,550 एकड़ उपजाऊ व शामलात जमीन का इंतकाल गैर-कानूनी और असंवैधानिक ढंग से वन विभाग के नाम चढ़ाने के मुद्दे पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया और आगामी कानूनी व जमीनी संघर्ष की रणनीति तैयार की गई। ऐतिहासिक सेटलमेंट और प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी का आरोप बैठक के दौरान प्रेस को जानकारी देते हुए किसान संघर्ष कमेटी के खजांची रविकांत शर्मा ने मामले के पुराने इतिहास और दस्तावेजी साक्ष्यों को उजागर करते हुए राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न चिन्ह खड़े किए: 1904 की फॉरेस्ट सेटलमेंट का हवाला: रविकांत शर्मा ने बताया कि वर्ष 1904 में अंग्रेज अधिकारी अलेक्जेंडर एंडरसन द्वारा बनाई गई ‘शाहपुरकंडी फॉरेस्ट सेटलमेंट’ के पन्ना संख्या 143 में यह स्पष्ट रूप से दर्ज है कि जमीन की मलकीत स्थानीय निवासियों/जमीन मालिकों की है, जबकि सरकार का अधिकार केवल चील के पेड़ों पर है। उपायुक्त पठानकोट का पत्र (2018): उन्होंने बताया कि उपायुक्त पठानकोट के कार्यालय द्वारा जारी पत्र संख्या SK/744-47 (दिनांक 10-08-2018) की भी विभाग द्वारा पूरी तरह अनदेखी की गई। इस पत्र के नियमों को ताक पर रखकर 27,550 एकड़ जमीन रातों-रात वन विभाग के नाम स्थानांतरित कर दी गई। आपत्तियों की उपेक्षा: 1904 की मूल फॉरेस्ट सेटलमेंट के किसी भी खसरा नंबर में गांव के नाम दर्ज इस 27,550 एकड़ जमीन का ऐसा कोई विवरण नहीं है जिससे इसे सीधे वन भूमि माना जाए। इसके अलावा, इंतकाल वन विभाग के नाम तब्दील करने से पूर्व प्रभावित जमीन मालिकों से कानूनन ‘उजर’ (सहमति या एतराज) तक नहीं मांगे गए। न्यायिक स्थितियां और पुराने अदालती फैसलों का संदर्भ
किसान नेताओं ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय तथा अन्य अदालतों में लंबित याचिकाओं के तकनीकी पहलुओं को रेखांकित करते हुए बताया: हाईकोर्ट का स्थगन आदेश :
वन विभाग के नाम इंतकाल चढ़ाने के प्रशासनिक फैसले के खिलाफ गांव खुखियाल और नारायणपुर के ग्रामीणों ने वर्ष 2020 में (केस संख्या 12197 और 12508/2020) तथा गांव चक्कड़ के भू-स्वामियों ने वर्ष 2024 में पंजाब एंड हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर की थीं। इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए माननीय हाईकोर्ट ने प्रक्रिया पर स्थगन आदेश दे रखा है। पुराने फैसलों का गलत इस्तेमाल:
कमेटी का आरोप है कि राजस्व विभाग जिस कानूनी आधार का तर्क दे रहा है, वह असल में केस संख्या 2630/1985 का फैसला है, जो केवल डूंग गांव की 4,417 कनाल पंचायती जमीन से संबंधित था। बाद में इसी याचिका को आधार बनाकर 8706/1988 का फैसला आया। परंतु विभाग इस सीमित फैसले को पूरी तहसील की 27,550 एकड़ निजी व शामलात जमीनों पर जबरन लागू कर रहा है। 250 से अधिक केस अदालतों में लंबित
क्षेत्र के 250 से अधिक किसानों ने अलग-अलग अदालतों में इस गलत इंतकाल प्रक्रिया के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए हैं। इसके बावजूद राजस्व विभाग न्यायालयों के अंतिम आदेशों की प्रतीक्षा किए बिना प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है, जो कि अवमानना और अन्यायपूर्ण है। आर-पार के संघर्ष की चेतावनी
बैठक में मौजूद किसान नेताओं और गणमान्य व्यक्तियों ने एक स्वर में कहा कि धार कलां के किसान सदियों से इन जमीनों पर खेती करते आ रहे हैं और उनके पास इसके राजस्व रिकॉर्ड मौजूद हैं। यदि सरकार और राजस्व विभाग ने न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन कर जबरन जमीनों को छीनने का प्रयास किया, तो पूरा धार क्षेत्र उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होगा। महापंचायत में ये रहे मौजूद गांव बुंगल में आयोजित इस महापंचायत में मुख्य रूप से निम्नलिखित किसान नेता और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। जिनमें राज कुमार (दुनेरा), अंगराज पठानिया (लहरून), जोगिंदर सिंह (पंजाला), कुणाल पठानिया, पूरन सिंह (प्लाटिया), रमेश शर्मा (सुकरेत), स्वर्ण सिंह, रमेश सिंह (चक्कड़), रोशन लाल (पूर्व सरपंच, सुखनियाल), सुखबीर सिंह (नंबरदार, नारायणपुर), रणधीर सिंह (पूर्व सरपंच, नारायणपुर), दयाल सिंह (सरपंच, नारायणपुर), सुनील कुमार (सरपंच, सुराल), बिशन शर्मा, नारायण दत्त, कमल सिंह (पूर्व गिरदावर), रमेश सिंह (नंबरदार, खुखियाल), केवल सिंह हाड़ा, बलवान सिंह (पूर्व सरपंच, सुकरेत), बीर सिंह (सरपंच, ढांगू सरा), मान सिंह, सुरजीत सिंह (दरंगखड्ड) के अलावा धार ब्लॉक के अन्य गावों से आए दर्जनों किसान उपस्थित थे।
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पठानकोट में 27,550 एकड़ जमीन का मामला गर्माया:वन विभाग के नाम इंतकाल दर्ज करने पर रोष; किसान संघर्ष कमेटी ने किया प्रदर्शन







