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पंजाब की एक नाबालिग लड़की को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सुरक्षा प्रदान की है। लड़की अपने माता-पिता व रिश्तेदारों के खिलाफ अदालत पहुंची थी। उसने दलील दी कि उसके माता-पिता और रिश्तेदार उसकी इच्छा के विरुद्ध उसका विवाह अपनी पसंद के लड़के से कराना चाहते हैं। जब उसने इस विवाह से इनकार किया, तो परिवार ने उस पर दबाव बनाना शुरू कर दिया, मारपीट तक की, जिसके चलते वह घर छोड़ने पर मजबूर हो गई। लड़की ने अपने दोस्त के साथ लिवइन में रहने का निर्णय लिया। उसने अदालत से अपनी जान और स्वतंत्रता की रक्षा की मांग की। याचिका में उसने दलील दी है कि जब वह बालिग हो जाएगी तो हिंदू धर्म अनुसार शादी करेगी। अदालत ने सभी दलीलों को सुनने के बाद फैसला दिया कि यह एक किशोरी है, जिसे देखभाल और सुरक्षा की सख्त आवश्यकता है। अदालत ने अधिकारियों को उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। 4 पॉइंट्स में जानें पूरा मामला… अदालत ने इस फैसलों को माना आधार मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने नंदकुमार बनाम केरल राज्य व अन्य (20 अप्रैल 2018) के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि भले ही पक्षकार विवाह के योग्य न हों, फिर भी उन्हें साथ रहने का अधिकार है और उनकी जीवन एवं स्वतंत्रता की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके अलावा, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के राजवीर कौर बनाम पंजाब राज्य व राजप्रीत कौर बनाम पंजाब राज्य मामलों के निर्णयों पर भी भरोसा किया गया। इसके बाद अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता को उसके माता-पिता और रिश्तेदारों द्वारा लगातार धमकियों, जबरदस्ती और शारीरिक हमले का शिकार बनाया गया है। उसे उसकी मर्जी के खिलाफ शादी करने के लिए मजबूर किया जा रहा था। लड़की की सुरक्षा और सलामती का यह गंभीर मुद्दा है। याचिकाकर्ता ने बताया कि वह अपनी जान बचाने के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर छिपने को मजबूर है और उसे झूठे मुकदमों में फंसाए जाने का डर है। लड़के की सुरक्षा भी जरूरी एडवोकेट सुभाष कुमार का कहना है कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने लड़की को प्रोटेक्शन देने के आदेश दिए हैं। यहां लड़की के दोस्त की सुरक्षा भी अहम है। उसकी सुरक्षा का भी ख्याल रखा जाना चाहिए। उसकी जान भी अहम है। दोनों के परिवार इस चीज से सहमत नहीं हैं।
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नाबालिग बोली- घरवाले जबरदस्ती मेरी शादी करा रहे:इंगेजमेंट कराई, इनकार करने पर मारने की धमकी दे रहे; पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सिक्योरिटी दी






