पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों में पुलिस द्वारा धाराओं के चयन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने एक अहम मामले की सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि डकैती जैसे गंभीर मामले को स्नैचिंग में बदलना न्यायिक प्रक्रिया से छेड़छाड़ के बराबर है। यह मामला जालंधर में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, तीन अज्ञात हमलावरों ने उस पर और उसके साथी पर बेसबॉल बैट और छैनी जैसे हथियारों से हमला किया। आरोप है कि हमलावरों ने दोनों को घायल कर दिया और उनके मोबाइल फोन, नकदी और मोटरसाइकिल लूटकर फरार हो गए। हल्की धाराएं लगाना जांच की निष्पक्षता पर सवाल इन गंभीर आरोपों के बावजूद पुलिस ने मामले को डकैती की बजाय स्नैचिंग की धाराओं में दर्ज कर लिया। इस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सूर्य प्रताप सिंह ने कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि एफआईआर में दर्ज तथ्यों के आधार पर यह मामला स्पष्ट रूप से डकैती का बनता है। ऐसे में हल्की धाराएं लगाना जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। जांच एजेंसियों अपने अधिकारों का इस्तेमाल करे निष्पक्ष कोर्ट ने जांच अधिकारी और संबंधित डीएसपी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है और पूछा है कि आखिर डकैती के मामले को स्नैचिंग में क्यों बदला गया। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी गलतियां केवल तकनीकी नहीं हैं, बल्कि इससे केस की गंभीरता और सजा दोनों प्रभावित होती हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियों को अपने अधिकारों का इस्तेमाल निष्पक्ष तरीके से करना चाहिए। वहीं, इसी मामले में अदालत ने आरोपी को नियमित जमानत भी दे दी, क्योंकि वह सात महीने से ज्यादा समय से हिरासत में था और जांच पूरी हो चुकी है।
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