शंभू-राजपुरा रेलवे ट्रैक (डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर) पर इस साल 27 अप्रैल को हुए बम धमाके की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपने हाथ में ले ली है। मामले में एफआईआर दर्ज करने के बाद NIA ने पटियाला जेल से गुरजिंदर सिंह उर्फ बाबा बेअंत को प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया है। एजेंसी ने मोहाली स्थित NIA अदालत से आरोपी का 8 दिन का रिमांड हासिल किया है। अदालत में NIA ने दलील दी कि आरोपी से पाकिस्तान, मलेशिया और अन्य विदेशी हैंडलरों के संबंधों को लेकर पूछताछ जरूरी है, ताकि पूरी साजिश का पर्दाफाश किया जा सके। दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को रिमांड पर भेज दिया। ब्लास्ट वाली रात क्या हुआ, 3 प्वाइंट में समझें 1.मुख्य आरोपी जगरूप सिंह उर्फ रूपा और उसका साथी गुरजिंदर सिंह उर्फ बाबा बेअंत शंभू के पास स्पेशल फ्रेट कॉरिडोर (मालगाड़ी रेलवे ट्रैक) पर आईईडी बम लगाने पहुंचे थे। 2.बम को सक्रिय करते समय समय से पहले धमाका हो गया। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि जगरूप सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। 3.गुरजिंदर सिंह कुछ दूरी पर खड़ा था, इसलिए वह बच गया और अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया। इन तीनों वारदातों में एक ही गिरोह
पंजाब पुलिस व एनआईए की जांच में सामने आया कि तीन वारदतों में एक ही गिरोह था। इसमें 7 नवंबर 2025 को मोगा में सीआईए (CIA) स्टाफ के दफ्तर पर हैंड ग्रेनेड हमला। फिर 23 जनवरी 2026 को सरहिंद में रेलवे ट्रैक पर आईईडी ब्लास्ट, जिसमें एक ट्रेन का इंजन क्षतिग्रस्त हुआ था। इसके बाद 27 अप्रैल 2026: शंभू रेलवे ट्रैक पर हुआ यह ताजा ब्लास्ट। पूछताछ में पता चला कि इन तीनों ही बड़ी घटनाओं को इसी एक मॉड्यूल ने अंजाम दिया था। हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद गुरजिंदर सिंह की गिरफ्तारी और मॉड्यूल के अन्य सदस्यों प्रदीप सिंह खालसा, कुलविंदर, सतनाम और गुरप्रीत की धरपकड़ के बाद NIA और स्थानीय पुलिस ने बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद किए हैं। इनमें रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG), हैंड ग्रेनेड, IED और अत्याधुनिक विदेशी पिस्टल शामिल हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक ये हथियार ड्रोन के जरिए सीमा पार से भेजे गए थे।
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