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कोर्ट-पंजाब पुलिस नाकाम, CM को लेटर भेजो:लुधियाना लॉटरी रिश्वत कांड; 7 साल में पुलिस वीडियो में दिख रहे 28 मुलाजिमों को नहीं पहचान पाई




लुधियाना की विशेष अदालत ने वीडियो क्लिप में दिखाई दे रहे 28 मुलाजिमों की पहचान न होने पर पंजाब पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने मामले को पंजाब के मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाने के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री के पास ही गृह विभाग का प्रभार भी है। सुनवाई के दौरान डिवीजन नंबर-3 थाना के SHO और सब-इंस्पेक्टर अमरजीत सिंह अदालत में पेश हुए। उन्होंने कहा कि अदालत के समक्ष बयान दर्ज कराने का अधिकार केवल विशेष जांच दल (SIT) के सदस्यों को है। हालांकि, विशेष न्यायाधीश अमरिंदर सिंह शेरगिल ने टिप्पणी की कि SHO अदालत को यह बताने की जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे हैं कि जांच के दायरे में मौजूद 28 वीडियो क्लिप में दिखाई दे रहे पुलिसकर्मियों की पहचान पुलिस कर सकती है या नहीं। अदालत ने यह भी कहा कि 13 मई को SHO ने मामले में अंतिम अवसर मांगा था, लेकिन उसके बाद भी कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई। मुख्य सचिव को लिखे पत्रों पर भी नहीं हुआ असर
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वीडियो में दिखाई देने वाले व्यक्तियों की पहचान सुनिश्चित कराने के लिए पंजाब सरकार के मुख्य सचिव को कई बार पत्र भेजे गए, लेकिन पुलिस कमिश्नरेट लुधियाना की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। मामले में प्रगति न होने पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने आदेश दिया कि इस संबंध में पंजाब के मुख्यमंत्री को पत्र भेजा जाए, ताकि मामले की समीक्षा कर वीडियो फुटेज में दिखाई दे रहे व्यक्तियों की पहचान के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें। 8 जुलाई तक टली सुनवाई
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई 2026 तय की है। 2019-20 के लॉटरी रिश्वत कांड से जुड़ा यह मामला है। यह मामला वर्ष 2019-20 का है। लॉटरी कारोबारी सुभाष केट्टी ने आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मी खुलेआम लॉटरी विक्रेताओं से रिश्वत ले रहे थे। उन्होंने उस समय के पुलिस कमिश्नर राकेश अग्रवाल को वीडियो सबूत भी सौंपे थे। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो सुभाष केट्टी ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद मार्च 2020 में एफआईआर दर्ज की गई। अब तक 11 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दर्ज हो चुका मामला अब तक 11 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा चुका है और 10 के खिलाफ चालान भी पेश किया जा चुका है। हालांकि, सुभाष केट्टी का दावा है कि स्टिंग ऑपरेशन के दौरान 28 पुलिसकर्मी कैमरे में कैद हुए थे। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि कार्रवाई केवल कुछ अधिकारियों तक ही सीमित क्यों रही और बाकी लोगों की पहचान अब तक क्यों नहीं हो सकी।



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