जालंधर में मंगलवार को बैडमिंटन खेलते वक्त खिलाड़ी को हार्ट अटैक आ गया। शॉट खेलते-खेलते वह कोर्ट पर लड़खड़ाकर गिर पड़ा और कुछ ही पलों में बेसुध हो गया। मैदान में मौजूद खिलाड़ियों के बीच अफरा-तफरी मच गई, लेकिन उसी वक्त स्टेडियम में खेल रहे दो डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को भांप लिया। उन्होंने बिना एक पल गंवाए सीपीआर शुरू किया और मेडिकल उपकरण मंगवाए। डॉक्टरों और स्पोर्टिंग स्टाफ की सूझबूझ से खिलाड़ी की जान बच गई। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया। खिलाड़ी की पहचान दीपक पुजारा के रूप में हुई है। खिलाड़ी का जान बचाते का वीडियो भी सामने आया है। अब सिलसिलेवार पूरा मामला पढ़िए… शॉट खेलते वक्त अचानक बिगड़ी तबीयत
घटना जालंधर के हंसराज स्टेडियम की है। बैडमिंटन खिलाड़ी दीपक पुजारा नियमित रूप से खेल रहे थे। खेल के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। वह कोर्ट के बीच लड़खड़ाने लगे और छाती में तेज दर्द के बाद बेसुध होकर गिर पड़े। डॉक्टरों ने तुरंत पहचाने हार्ट अटैक के लक्षण
स्टेडियम में मौजूद डॉ. नीतीश गर्ग और डॉ. पीयूष शर्मा ने दीपक की हालत देखते ही हार्ट अटैक के लक्षण पहचान लिए। उन्होंने बिना देरी किए मौके पर ही प्राथमिक उपचार शुरू कर दिया। मेडिकल किट मंगवाकर शुरू किया उपचार
डॉक्टरों ने तुरंत टीम को मेडिकल किट और मशीन लाने के निर्देश दिए। मेडिकल टीम के पहुंचने से पहले ही दोनों डॉक्टरों ने दीपक को सीपीआर देना शुरू कर दिया। लगातार प्रयासों के जरिए उनकी सांसें और धड़कनें सामान्य करने की कोशिश की गई। कार्डियक शॉक देकर बचाई जान
स्थिति गंभीर होती देख डॉक्टरों ने जरूरी मेडिकल प्रक्रिया अपनाई और कार्डियक शॉक देकर दीपक की जान बचाने में सफलता हासिल की। समय पर मिले उपचार से उनकी हालत स्थिर हो गई। मेडिकल टीम के पहुंचने के बाद दीपक को फर्स्ट एड दी गई। इसके बाद एंबुलेंस की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका आगे का इलाज शुरू किया गया। घटना का वीडियो भी आया सामने
पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि खिलाड़ी के गिरते ही डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ मौके पर पहुंचते हैं और स्टेडियम में ही उसका उपचार शुरू कर देते हैं। डॉक्टरों की तत्परता और स्पोर्टिंग स्टाफ की मदद से एक बड़ा हादसा टल गया। डॉक्टरों की सूझबूझ बनी जीवनदान
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यदि कुछ मिनट की भी देरी हो जाती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। समय रहते सीपीआर और अन्य मेडिकल सहायता मिलने से दीपक पुजारा की जान बच गई।
Source link
