प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पूर्व उप निदेशक (डिप्टी डायरेक्टर) निरंजन सिंह ने जालंधर में सोमवार को एक निजी होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पंजाब में नशे के मुद्दे पर खुलकर बात की। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल के दौरान भारत सरकार के उच्च अधिकारियों और तत्कालीन पंजाब सरकार ने ड्रग्स मामलों की जांच में लगातार दखलअंदाजी की। निरंजन सिंह ने बताया कि जब वह ईडी के जालंधर जोनल दफ्तर में तैनात थे, तब उन्होंने ड्रग्स के कई बड़े मामलों को हैंडल किया था। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने 25 आरोपियों को सजा दिलवाई और ड्रग्स तस्करी से जुड़ी सैकड़ों करोड़ रुपये की संपत्ति को अटैच (कुर्क) करवाया। उन्होंने जांच में सहयोग करने और न करने वाले, दोनों तरह के लोगों का धन्यवाद किया। राजा कंडोला और पोला केस में दखलअंदाजी उन्होंने बताया कि साल 2012 से 2017 तक मशहूर ‘राजा कंडोला’ और ‘पोला’ ड्रग केस की कमान उनके पास थी। इसी जांच के दौरान भारत सरकार की अथॉरिटी ने बार-बार हस्तक्षेप किया, जिसके चलते उनके 20 अधिकारियों का ट्रांसफर तक कर दिया गया। निरंजन सिंह ने इसे पंजाब के लोगों के खिलाफ एक जंग और दुश्मनी करार दिया। पूर्व उप निदेशक ने खुलासा किया कि उन्होंने साल 2023, 2024, 2025 और अब 2026 में भी भारत सरकार को कई पत्र लिखे हैं। इन पत्रों में उन्होंने आरोप लगाया है कि ईडी के तत्कालीन डायरेक्टर संजय मिश्रा, कर्नल सिंह और राजन कटोच उन आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रहे थे, जिनकी वे जांच कर रहे थे। पंजाब पुलिस और सरकार का दबाव निरंजन सिंह ने तत्कालीन पंजाब सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उस समय की राज्य सरकार नहीं चाहती थी कि वे इस केस की जांच करें। इसके लिए पंजाब पुलिस की अथॉरिटी ने भारत सरकार पर दबाव बनाया, जिसके बाद केस की फाइल को ही ट्रांसफर कर दिया गया। उन्होंने बताया कि फाइल ट्रांसफर होने के बाद लंबे समय तक केस संजय मिश्रा के पास रहा, लेकिन उन्होंने इस पर कोई जांच नहीं की। पत्रों के जरिए दबाव बनाने के बाद थोड़ी-बहुत कार्रवाई तो हुई, लेकिन बाद में जांच को फिर से बंद कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में भी भारत सरकार में बैठे कुछ अधिकारी दोषियों को बचाने में जुटे हैं, जिसके कारण एक साल बीत जाने के बाद भी जांच अधूरी पड़ी है।
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