भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी गुट) ने गोहाना में केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज और भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में भूख हड़ताल शुरू कर दी। संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यवान नरवाल के नेतृत्व में किसान लघु सचिवालय परिसर में एकत्र हुए और धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों का कहना है कि छात्रों पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है, जबकि भारत-अमेरिका ट्रेड डील किसानों के हितों के विपरीत है। उन्होंने सरकार से दोनों मामलों में तुरंत सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की और चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। लघु सचिवालय में शुरू हुई भूख हड़ताल भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी गुट) के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान गोहाना के लघु सचिवालय परिसर पहुंचे। यहां प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यवान नरवाल के नेतृत्व में किसानों ने भूख हड़ताल शुरू की। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए छात्रों और किसानों के मुद्दों को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। छात्रों पर लाठीचार्ज की निंदा किसानों ने कहा कि जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा किया गया लाठीचार्ज बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन है। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं है और इस घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। छात्रों की मांगों के समर्थन में उतरी किसान यूनियन प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यवान नरवाल ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन छात्रों की जायज मांगों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने छात्रों पर बेरहमी से लाठियां बरसाईं, जिसे किसी भी हाल में उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों की बात सुनकर उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए। भारत-अमेरिका ट्रेड डील वापस लेने की मांग सत्यवान नरवाल ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील का भी विरोध करते हुए कहा कि यह समझौता किसानों के हितों के खिलाफ है। उनका कहना था कि यदि यह डील लागू होती है तो देश के किसानों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से इस ट्रेड डील को तत्काल वापस लेने की मांग की। आंदोलन तेज करने की चेतावनी
किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने छात्रों के मुद्दे और ट्रेड डील को लेकर सकारात्मक कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान संगठन आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे और जरूरत पड़ने पर बड़े स्तर पर आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
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