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चपरासी से कम ताकतवर मेयर विवाद में तिवारी की एंट्री:जोशी का समर्थन, चंडीगढ़ के लिए राज्यसभा सीट और मेयर कार्यकाल 5 साल की वकालत




चंडीगढ़ के मेयर की पावर को लेकर चल रही कंट्रोवर्सी में अब सांसद व कांग्रेस नेता मनीष तिवारी की एंट्री हो गई है। उन्होंने भाजपा मेयर सौरभ जोशी की बात का समर्थन किया है। मनीष तिवारी ने कहा कि 1996 में नगर निगम के गठन के बाद से ही इसे कमजोर करने की लगातार कोशिशें होती रही हैं। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से मांग की है कि इन प्राइवेट बिलों को सरकारी विधेयक बनाया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में चंडीगढ़ की निर्वाचित संस्थाएं गैर-निर्वाचित अधिकारियों पर अत्यधिक निर्भर हैं। अब सांसद की सारी बात को तीन पॉइंट में जानते हैं – निगम बनने के बाद से कमजोर करने की कोशिशें शुरू: कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी द्वारा नगर निगम की सीमित शक्तियों पर जताई गई चिंता का समर्थन किया है। मनीष तिवारी ने कहा कि 1996 में नगर निगम के गठन के बाद से ही इसे कमजोर करने की लगातार कोशिशें होती रही हैं। संसद में प्राइवेट बिल तक पेश किया: मनीष तिवारी ने कहा कि इसी वजह से उन्होंने लोकसभा में एक निजी विधेयक (प्राइवेट मेंबर बिल) पेश किया था, जिसमें चंडीगढ़ में पांच साल के लिए सीधे चुने गए मेयर को अधिक अधिकार देने और मेयर-इन-काउंसिल व्यवस्था को मजबूत करने का प्रस्ताव रखा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने चंडीगढ़ के लिए राज्यसभा की एक सीट का प्रावधान करने संबंधी बिल भी पेश किया है। प्राइवेट बिलों को सरकारी विधेयक बनाया जाए: मनीष तिवारी ने मेयर सौरभ जोशी और उनके सहयोगियों से इन प्रस्तावों का समर्थन करने की अपील की। साथ ही उन्होंने गुलाब चंद कटारिया और अमित शाह से आग्रह किया कि इन निजी विधेयकों को सरकारी विधेयक के रूप में अपनाया जाए, ताकि चंडीगढ़ की राजनीतिक व्यवस्था को अधिक अधिकार और स्वायत्तता मिल सके। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में चंडीगढ़ की निर्वाचित संस्थाएं गैर-निर्वाचित अधिकारियों पर अत्यधिक निर्भर हैं। ऐसे शुरू हुआ विवाद उत्तराखंड के ऋषिकेश में पिछले दिनों दो दिवसीय अखिल भारतीय महापौर परिषद का सम्मेलन हुआ। इस दौरान सौरभ जोशी ने मेयर की सीमित पावर पर कटाक्ष किया था। उन्होंने कहा कि हमसे अच्छा तो ऑफिस का चपरासी है। वह काम करवा सकता है, लेकिन मेयर नहीं। देश के 60 मेयरों की मौजूदगी में जोशी ने मेयर के डायरेक्ट चुनाव, पांच साल के कार्यकाल और नगर निगमों को ज्यादा प्रशासनिक व फाइनेंशियल पावर देने की मांग उठाई थी।



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