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तख्तापलट के बाद रीना खरकाली को कार्यकारी चेयरपर्सन की जिम्मेदारी:पार्षदों ने लगाए गंभीर आरोप, बोले- ग्रांट वितरण में भेदभाव और चुनावों में पार्टी विरोधी गतिविधियां हुईं




करनाल जिला परिषद में अविश्वास प्रस्ताव के बाद हुए तख्तापलट के बाद आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गया है। इस घटनाक्रम के बाद परिषद के कई पार्षद भी खुलकर सामने आए और प्रेस वार्ता में पूर्व चेयरमैन पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। पार्षदों ने ग्रांट वितरण में भेदभाव, मान-सम्मान की कमी और यहां तक कि चुनावों के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप भी लगाए हैं। कार्यकारी चेयरपर्सन ने पूर्व चेयरमेन प्रतिनिधि द्वारा लगाए गए षड्यंत्र और खरीद फरोख्त के आरोपों को भी सिरे से खारिज कर दिया।
ग्रांट में भेदभाव बना विवाद की मुख्य वजह
अब उप-चेयरपर्सन रीना खरकाली को कार्यकारी चेयरपर्सन की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। नया चेयरपर्सन नियुक्त होने तक वे ही कार्यभार संभालेंगी। रीना खरकाली ने जिला परिषद में हुए तख्तापलट को एक दिन की घटना न बताते हुए कहा कि यह लंबे समय से चल रही असंतोष की स्थिति का परिणाम है। उन्होंने बताया कि जब सभी पार्षद जीतकर आए थे, तब वे तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मिले थे। उस दौरान यह स्पष्ट कहा गया था कि जो भी चेयरमैन बनेगा, वह सभी पार्षदों को साथ लेकर चलेगा और सभी वार्डों में समान रूप से ग्रांट वितरित की जाएगी।
लेकिन एक साल के भीतर ही ग्रांट वितरण में असमानता शुरू हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रांट अपने चहेतों को दी गई और जाति के आधार पर भी भेदभाव किया गया। खास तौर पर एससी और बीसी समाज के पार्षदों को नजरअंदाज किया गया। इस मुद्दे को लेकर विधायकों से भी शिकायत की गई थी और उन्होंने हस्तक्षेप भी किया, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। षड्यंत्र के आरोपों को किया खारिज
पूर्व चेयरमैन प्रवेश राणा के पति सोहन सिंह राणा द्वारा लगाए गए षड्यंत्र के आरोपों पर रीना खरकाली ने साफ कहा कि किसी प्रकार का कोई षड्यंत्र नहीं रचा गया। उन्होंने कहा कि सभी पार्षद लंबे समय से परेशान थे क्योंकि न तो उन्हें ग्रांट मिल रही थी और न ही उनका सम्मान किया जा रहा था।
उन्होंने बताया कि विधायकों ने भी कई बार दोनों पक्षों को बैठाकर समझौता कराने की कोशिश की, ताकि सभी पार्षदों को समान रूप से विकास कार्यों का लाभ मिल सके। बावजूद इसके, कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। अविश्वास प्रस्ताव भी कई महीनों से चल रहा था, लेकिन सुधार नहीं होने के कारण अंततः यह स्थिति बनी। अब समान विकास का भरोसा
रीना खरकाली ने कहा कि अब जिला परिषद का लगभग एक से सवा साल का कार्यकाल बचा है और इस दौरान वे सभी पार्षदों को साथ लेकर चलेंगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हर वार्ड में समान रूप से ग्रांट दी जाएगी और किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि परिषद का उद्देश्य केवल विकास कार्यों को आगे बढ़ाना है। चुनावों में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप
प्रेस वार्ता के दौरान रीना खरकाली ने यह भी आरोप लगाया कि सोहन सिंह राणा ने विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह आरोप केवल उनके नहीं बल्कि क्षेत्र के लोगों द्वारा लगाए जा रहे हैं। महापंचायत और बिरादरी राजनीति पर प्रतिक्रिया
25 जुलाई को प्रस्तावित महापंचायत के सवाल पर रीना खरकाली ने कहा कि जिला परिषद के पार्षद किसी एक बिरादरी से नहीं बल्कि अलग-अलग समाजों से आते हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी नेता केवल एक बिरादरी का नहीं होता, बल्कि उसे सभी 36 बिरादरियों को साथ लेकर चलना होता है। खरीद-फरोख्त के आरोपों को नकारा
पार्षदों की खरीद-फरोख्त के सवाल पर रीना खरकाली ने कहा कि 17 पार्षद उनके साथ मजबूती से खड़े हैं और यह समर्थन पूरी तरह स्वेच्छा से है। उन्होंने कहा कि पार्षद इसलिए उनके साथ आए क्योंकि उनके कार्य नहीं हो रहे थे और उन्हें सम्मान नहीं मिल रहा था। पार्षद प्रदीप राणा का बयान
पार्षद प्रदीप राणा ने कहा कि उन्होंने पहले सोहन सिंह राणा का पूरा साथ दिया था और प्रवेश राणा को चेयरपर्सन बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन पिछले छह महीनों से 17 पार्षद अविश्वास प्रस्ताव पर एकजुट थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्षदों को अपने पक्ष में करने के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन सभी पार्षद एकजुट रहे। उन्होंने यह भी कहा कि राजपूत समाज की बैठक बुलाकर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है, जिसका असर भविष्य के चुनावों पर पड़ सकता है।
प्रदीप राणा ने कहा कि किसी भी चुनाव में केवल एक समाज की नहीं बल्कि सभी समाजों की भूमिका होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि घरौंडा विधानसभा चुनाव में वीरेंद्र सिंह राठौर को मिले वोट केवल राजपूत समाज के नहीं थे, बल्कि रोड समाज सहित अन्य वर्गों का भी योगदान रहा। इसी तरह भाजपा विधायक योगेंद्र राणा को जिताने में भी विभिन्न समाजों की भूमिका रही। पाला राम का जुबानी हमला
पार्षद पाला राम ने भी सोहन सिंह राणा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने विधायकों और पार्षदों का सम्मान नहीं किया, वह नेतृत्व करने के योग्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि एससी समाज को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। विनोद कश्यप ने लगाए वित्तीय अनियमितताओं के आरोप
वार्ड 19 के पार्षद विनोद कश्यप ने कहा कि उन्होंने कई पंचायतों के प्रस्ताव भेजे, लेकिन उनके वार्ड में कोई ग्रांट नहीं आई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रवेश राणा ने अपने वार्ड में करीब 14 करोड़ रुपये और वार्ड 17 में साढ़े तीन करोड़ रुपये की ग्रांट लगाई। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण कार्यशैली को दर्शाता है और वे इसके प्रमाण भी प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लोकसभा चुनावों के दौरान सोहन सिंह राणा ने खुद कहा था कि सरकार कांग्रेस की बनने वाली है और वे कांग्रेस में शामिल हो जाएंगे। वोट डलवाने के गंभीर आरोप
एक पार्षद ने यह भी आरोप लगाया कि सोहन सिंह राणा ने इंद्री हल्के में राजकुमार कश्यप के खिलाफ वोट डलवाए। साथ ही घरौंडा क्षेत्र में भी भाजपा के खिलाफ मतदान करवाने का आरोप लगाया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद करनाल जिला परिषद की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। आने वाले समय में नए चेयरपर्सन की नियुक्ति और परिषद के कामकाज की दिशा पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।



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