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चंडीगढ़ में नेताओं-अफसरों ने छोड़ीं सरकारी गाड़ियां:गवर्नर बस से पहुंचे दफ्तर, चीफ सेक्रेटरी साइकिल और मेयर ने ऑटो से आए




चंडीगढ़ में पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत को बढ़ावा देने के लिए बुधवार को नो व्हीकल वेडनसडे अभियान के तहत प्रशासन और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने सरकारी वाहनों का इस्तेमाल नहीं किया। शहर में राजभवन से लेकर नगर निगम कार्यालय तक अलग ही नजारा देखने को मिला, जहां कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि सार्वजनिक परिवहन, साइकिल और पैदल चलकर अपने कार्यालय पहुंचे। पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने सरकारी वाहन की बजाय बस में सफर कर कार्यालय पहुंचकर लोगों को सार्वजनिक परिवहन अपनाने का संदेश दिया। वहीं यूटी के मुख्य सचिव ने साइकिल चलाकर कार्यालय पहुंचते हुए पर्यावरण संरक्षण की पहल में भागीदारी निभाई। मेयर सौरभ जोशी ऑटो से पहुंचे मेयर सौरभ जोशी ने भी सरकारी वाहन का उपयोग नहीं किया। वे ऑटो से नगर निगम कार्यालय पहुंचे और कई कार्यक्रमों व बैठकों में पैदल जाकर शामिल हुए। उन्होंने कहा कि छोटी दूरी के लिए निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने की जरूरत है। पैदल चलने और साइकिल के उपयोग से न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि लोगों की सेहत भी बेहतर होगी। चंडीगढ़ हमेशा पर्यावरण के अनुकूल मेयर ने कहा कि चंडीगढ़ हमेशा पर्यावरण के अनुकूल पहलों में अग्रणी रहा है। शहर को स्वच्छ, हरित और टिकाऊ बनाने के लिए नागरिकों को भी ऐसे अभियानों से जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि रोजमर्रा की जिंदगी में किए गए छोटे-छोटे बदलाव भविष्य में बड़ा असर डाल सकते हैं। नो व्हीकल वेडनसडे ईंधन की बचत प्रशासन का मानना है कि नो व्हीकल वेडनसडे जैसी पहल से वायु प्रदूषण कम होगा, ईंधन की बचत होगी और सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव भी घटेगा। अधिकारियों ने शहरवासियों से अपील की है कि वे सप्ताह में कम से कम एक दिन सार्वजनिक परिवहन, साइकिल या पैदल चलने को प्राथमिकता दें, ताकि चंडीगढ़ को पर्यावरण के अनुकूल शहर बनाने के प्रयासों को मजबूती मिल सके।



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