चंडीगढ़ की सड़कें अब न सिर्फ ज़्यादा रोशन होंगी, बल्कि स्मार्ट भी बन जाएंगी। नगर निगम शहर की पुरानी 18 वॉट की स्ट्रीट लाइटों को हटाकर उनकी जगह 12 वॉट की नई LED लाइटें लगाने जा रहा है। वॉट कम होने के बावजूद रोशनी पहले से ज़्यादा तेज़ मिलेगी। इसके साथ ही, अब लाइट खराब होने पर आपको शिकायत के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे, क्योंकि सिस्टम खुद बता देगा कि लाइट कहाँ बंद है। अब पावर कम, रोशनी फुल
नई तकनीक की इन LED लाइटों का लुमेन (रोशनी की तीव्रता) ज़्यादा है। यानी यह बिजली कम खाएँगी, लेकिन सड़क पर उजाला ज़्यादा करेंगी। इससे निगम को दोहरा फायदा होगा। शहर चमकेगा भी और बिजली का भारी-भरकम बिल भी घटेगा। इस नए सिस्टम से नगर निगम साल भर में करोड़ों रुपये की बिजली बचाएगा। साथ ही, सेक्टर-17 स्थित कमांड सेंटर (ICCC) से पूरे शहर की 55 हज़ार लाइटों पर नज़र रखी जाएगी। यानी अब शहर की सुरक्षा भी बढ़ेगी और सरकारी खज़ाने पर बोझ भी कम होगा। पार्षदों के पास होगा रिमोट कंट्रोल
अब किसी वार्ड का पार्षद यह बहाना नहीं बना पाएगा कि उसे लाइट खराब होने का पता नहीं था। निगम एक ऐसा मोबाइल डैशबोर्ड तैयार कर रहा है, जिससे हर पार्षद अपने वार्ड की लाइटों को लाइव देख सकेगा। मोबाइल पर ही पता चल जाएगा कि कितनी लाइटें जल रही हैं और कितनी खराब हैं। खराब लाइट की लोकेशन तुरंत ट्रैक होगी और रिपेयरिंग टीम मौके पर पहुँचेगी। 6 महीने से अंधेरे में था शहर
पिछले 6 महीनों से शहर की हालत खस्ता थी। करीब 30 प्रतिशत लाइटें बंद पड़ी थीं, क्योंकि पुराना कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो चुका था। अब निगम PPP मॉडल पर नई एजेंसी ला रहा है, जो अगले 10 सालों तक इन लाइटों की देखरेख करेगी। इसमें ‘डिमिंग’ फीचर भी होगा, यानी ज़रूरत के हिसाब से रोशनी को कम या ज़्यादा भी किया जा सकेगा।
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