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चंडीगढ़ कोर्ट ने SI-ASI समेत 4 को भेजा जेल:₹661 करोड़ के आरोपी वाधवा को हाेटल में लेकर गए; इलाज के बहाने करवाई ऐश




चंडीगढ़ और हरियाणा में चर्चित ₹661 करोड़ के चर्चित सरकारी फंड घोटाले के आरोपी विक्रम सिंह वाधवा को चंडीगढ़ पुलिस इलाज के बहाने होटल ले जाने के मामले में गिरफ्तार किए गए 4 आरोपियों को बुधवार को जिला अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। गिरफ्तार आरोपियों में चंडीगढ़ पुलिस के एसआई जगमेर सिंह, एएसआई सुरेश कुमार, आरोपी विक्रम वाधवा के उसके दोनों बेटे करण व कुनाल शामिल हैं। बता दे आरोपी विक्रम वाधवा को मंगलवार ही बुडैल जेल भेज दिया। मामला मंगलवार को उस समय सामने आया था, जब जेल से इलाज के लिए निकाले गए विक्रम वाधवा को अस्पताल ले जाने के बजाय सेक्टर-17 स्थित एक होटल में ले जाया गया। सूचना मिलने पर चंडीगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने होटल में छापा मारकर सभी को हिरासत में लिया था। पूछताछ के बाद पांचों के खिलाफ सेक्टर-17 थाना में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया था। इलाज के बजाय होटल पहुंची पुलिस टीम जानकारी के अनुसार, विक्रम वाधवा ने जेल में पेट में संक्रमण की शिकायत की थी। इसके बाद उसे इलाज के लिए सेक्टर-16 स्थित सरकारी अस्पताल ले जाने की अनुमति मिली थी। तय प्रक्रिया के तहत पुलिस सुरक्षा में उसे बुड़ैल जेल से बाहर निकाला गया, लेकिन अस्पताल जाने के बजाय पुलिस टीम उसे सीधे सेक्टर-17 स्थित होटल सिटी हार्ट ले गई। आरोप है कि होटल में वाधवा ने अपनी पत्नी और दोनों बेटों करण व कुनाल से मुलाकात की, खाना खाया और काफी देर तक वहीं रुका रहा। इसी दौरान किसी ने इसकी सूचना वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दे दी। सूचना मिलते ही अधिकारियों ने होटल में छापा मारकर सभी को पकड़ लिया। एसआई और एएसआई समेत 5 किए थे गिरफ्तार पुलिस ने एसआई जगमेर सिंह, एएसआई सुरेश कुमार, विक्रम वाधवा और उसके दोनों बेटों करण व कुनाल को गिरफ्तार कर लिया। सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 199, 261, 262, 62 और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी को अस्पताल की बजाय होटल ले जाने की योजना पहले से बनाई गई थी या नहीं। होटल के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, एंट्री रजिस्टर, मोबाइल फोन की लोकेशन और कॉल डिटेल खंगाली जा रही हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि होटल में वाधवा किन लोगों से मिला और वहां कितनी देर तक रुका। डीएसपी एसपीएस सोंधी ने बताया कि गिरफ्तार पुलिसकर्मियों के मामले में उनके ड्यूटी रिकॉर्ड, मूवमेंट और वरिष्ठ अधिकारियों से हुई बातचीत की भी जांच की जा रही है। जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। विक्रम वधवा पर घोटाले के ये 3 आरोप सरकारी फंड का गबन: आरोप है कि उसने सह-आरोपियों (जैसे रिभव ऋषि और अभय कुमार), बैंक कर्मचारियों और सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर हरियाणा सरकार के विभागों, चंडीगढ़ नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट (CREST) के खातों से करोड़ों रुपये का सरकारी पैसा फर्जी तरीके से प्राइवेट फर्मों में ट्रांसफर कराया। शेल कंपनियों का इस्तेमाल: स्वस्तिक देश प्रोजेक्ट्स और कैपको फिनटेक सर्विसेज जैसी कई शेल कंपनियों के जरिए पैसों की लेयरिंग की गई। इन कंपनियों से पैसा ज्वैलर्स को भेजा जाता था, जो बदले में इन्हें कैश देते थे। वह कैश बाद में अफसरों और विक्रम वाधवा जैसे बिजनेसमैनों में बांटा जाता था। प्रॉपर्टी में निवेश: वाधवा इस अपराध की कमाई के मुख्य लाभार्थियों में से एक है। उसने इस पैसे को प्रीमियम रेजिडेंशियल और कमर्शियल रियल एस्टेट प्रॉपर्टीज में निवेश किया। पुलिस ने उसकी लगभग ₹70 करोड़ की संपत्तियों की पहचान की है। मामला खुलने के बाद मोहाली से गिरफ्तार हुआ फरवरी 2026 में घोटाला सामने आने के बाद वाधवा फरार हो गया था और उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया था। आखिरकार मार्च 2026 में चंडीगढ़ पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उसे मोहाली (खरड़) के एक ठिकाने से गिरफ्तार किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए ED ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत जांच शुरू की और 29 मई 2026 को विक्रम वाधवा को अपनी कस्टडी में ले लिया। चंडीगढ़ की एक अदालत ने एक मामले में समय पर चार्जशीट न दाखिल होने के आधार पर उसे तकनीकी जमानत दे दी थी, लेकिन वह रिहा नहीं हो सका क्योंकि वह अन्य संबंधित मामलों में अब भी न्यायिक हिरासत में है।



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