गुजरात की साबरमती जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ चंडीगढ़ जिला अदालत में चल रहे दो पुराने आपराधिक मामलों की सुनवाई गवाहों की गैरहाजिरी के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही है। अदालत शिकायतकर्ता और अन्य गवाहों को कई बार समन और वारंट जारी कर चुकी है, लेकिन कोई भी पेश नहीं हो रहा। ऐसे में दोनों मामलों की सुनवाई बार-बार टल रही है। दोनों मामले करीब 14 और 15 साल पुराने हैं। इनमें लॉरेंस बिश्नोई पर हत्या के प्रयास, मारपीट, फायरिंग और आर्म्स एक्ट समेत गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज हैं। अदालत को बार-बार यह रिपोर्ट मिल रही है कि संबंधित गवाह या तो दिए गए पते पर नहीं मिल रहे या फिर शहर से बाहर हैं। कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी अदालत में पेश न होने पर जमानती वारंट जारी किए जा चुके हैं। सेक्टर-40 में घर पर हमला पहला मामला 29 जून 2011 का है। पुलिस के अनुसार सेक्टर-40 में झगड़े की सूचना मिलने पर जांच की गई थी। शिकायतकर्ता हरप्रीत ने आरोप लगाया था कि छात्र संगठन की रंजिश के चलते उसी रात करीब 8:45 बजे लॉरेंस बिश्नोई अपने 4-5 साथियों के साथ उसके घर पहुंचा। सभी ने चेहरे ढके हुए थे और मारपीट की। आरोप है कि लॉरेंस के पास पिस्टल थी, जबकि उसके साथियों के हाथों में तलवार और अन्य हथियार थे। घटना के दौरान लॉरेंस का चेहरा ढकने वाला रुमाल गिर गया, जिससे उसकी पहचान हो गई। डीएवी कॉलेज में फायरिंग दूसरा मामला 12 जून 2012 का है। उस समय पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र संगठनों पुसू और सोपू के बीच खूनी झड़प हुई थी। आरोप है कि डीएवी कॉलेज, सेक्टर-10 में स्टार नाइट की तैयारियों के दौरान लॉरेंस बिश्नोई और अमनदीप सिंह मुल्तानी की अगुवाई में सोपू समर्थकों ने पुसू समर्थकों पर हमला किया। इस दौरान गोलीबारी और धारदार हथियारों का इस्तेमाल हुआ, जिसमें छात्र चरनदेव सिंह को गोली लगी थी और कई अन्य छात्र घायल हुए थे। शिकायतकर्ता लगातार नहीं हो रहा पेश डीएवी कॉलेज फायरिंग मामले में शिकायतकर्ता अंकित ग्रोवर को पिछले एक साल से लगातार समन भेजे जा रहे हैं, लेकिन वह अदालत में पेश नहीं हो रहा। कभी रिपोर्ट आती है कि वह दिए गए पते पर नहीं रहता, तो कभी बताया जाता है कि वह शहर से बाहर है। अन्य गवाहों की भी यही स्थिति है, जिससे सुनवाई प्रभावित हो रही है। चार आरोपी पहले ही हो चुके हैं बरी सेक्टर-3 थाना पुलिस ने इस मामले में लॉरेंस बिश्नोई समेत पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। हालांकि 18 फरवरी 2014 को निचली अदालत ने अमनदीप सिंह मुल्तानी, विक्की मिट्ठूखेड़ा (अब मृतक), तरसेम सिंह और रंजोध सिंह को बरी कर दिया था। उस समय शिकायतकर्ता और अन्य गवाह अपने पहले दिए गए बयानों से मुकर गए थे। शिकायतकर्ता अंकित ग्रोवर ने भी अदालत में अपना बयान बदल दिया था, जिसके चलते चारों आरोपियों को संदेह का लाभ मिल गया था। अब इस मामले में केवल लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ सुनवाई लंबित है।
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