गुरुग्राम की सड़कों पर रील बनाने के लिए अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डालने वाले स्टंटबाजों पर लगाम कसने के लिए कमिश्नरेट पुलिस ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। शहर की सड़कों को सुरक्षित बनाने और सोशल मीडिया पर वायरल होने के चक्कर में ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों से निपटने के लिए दो विशेष ट्रैफिक एनफोर्समेंट टास्क फोर्स (STF) टीमों का गठन किया गया है। यह पूरी कार्रवाई डीसीपी ट्रैफिक की सीधी अगुवाई में अमल में लाई जाएगी। इस नवगठित एसटीएफ का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर होने वाली कानून व्यवस्था की समस्याओं और जानलेवा स्टंट्स पर पूरी तरह से रोक लगाना है। पुलिस के मुताबिक यह स्पेशल फोर्स सड़क पर होने वाली रोड रेज की घटनाओं, बेहद तेज और खतरनाक तरीके से वाहन चलाने वालों, स्टंट ड्राइविंग और ओवर स्पीडिंग करने वालों पर पैनी नजर रखेगी। अक्सर देखा गया है कि युवा वर्ग चंद लाइक्स और फॉलोअर्स के लिए व्यस्त सड़कों, हाईवे और चौराहों पर गाड़ियां दौड़ाते हैं और खतरनाक स्टंट करते हैं, जिससे आम जनता में दहशत का माहौल बना रहता है। अब ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। डिजिटल दुनिया पर भी रहेगी एसटीएफ की नजर
यह टास्क फोर्स सिर्फ ऑन-ग्राउंड यानी सड़कों पर ही मुस्तैद नहीं रहेगी, बल्कि डिजिटल दुनिया में भी निगरानी रखेगी। एसटीएफ की एक विशेष विंग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक पर लगातार निगरानी रखेगी। इंटरनेट पर वायरल होने वाले ऐसे सभी वीडियो, रील्स और पोस्ट को खंगाला जाएगा। जिसमें ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन या खतरनाक स्टंट दिखाए गए हों। पुलिस इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचेगी। FIR से गिरफ्तारी तक की होगी सख्त कार्रवाई
पुलिस ने साफ कर दिया है कि केवल चालान काटकर छोड़ देने की ढिलाई अब नहीं बरती जाएगी। सोशल मीडिया पर रील या वीडियो पोस्ट करने वाले हुड़दंगियों की पहचान कर उन्हें बाकायदा चिन्हित किया जाएगा। इसके बाद उनके खिलाफ न सिर्फ भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सीधे एफआईआर दर्ज होगी। जरूरत पड़ने पर आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार भी किया जाएगा और उनके वाहनों को सीज करने की कार्रवाई की जाएगी। स्टंटबाजों के लिए अलर्ट, जानिए कैसे काम करेगी एसटीएफ……………. एआई और सीसीटीवी कमांड सेंटर का उपयोग: एसटीएफ इंट्रीग्रेटेड स्मार्ट सिटी कमांड सेंटर से जुड़ी रहेगी। शहर के मुख्य चौराहों और एक्सप्रेसवे पर लगे हाई-डेफिनिशन कैमरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सॉफ्टवेयर की मदद से खतरनाक ड्राइविंग या स्टंट की पहचान तुरंत ऑटोमैटिक अलर्ट के जरिए की जाएगी। अंडरकवर वाहनों तैनाती: स्टंटबाजों के छिपे हुए ठिकानों, जैसे देर रात सुनसान हाईवे या नए बने सेक्टर्स की सड़कों पर, एसटीएफ के जवान बिना पुलिस लोगो वाली गाड़ियों (अंडरकवर वाहनों) में तैनात रहेंगे ताकि आरोपी पुलिस को देखकर भाग न सकें। पेरेंट्स की काउंसलिंग और बॉन्ड भरवाना: यदि स्टंट करने वाला आरोपी नाबालिग पाया जाता है, तो एसटीएफ न केवल वाहन मालिक का चालान करेगी, बल्कि उसके माता-पिता को तलब कर काउंसलिंग करेगी। इसके साथ ही उनसे भविष्य में ऐसा न होने देने का कानूनी बॉन्ड भी भरवाया जाएगा। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स का डेटाबेस: यह टीम सिर्फ वीडियो पर नजर नहीं रखेगी, बल्कि बार-बार नियम तोड़ने वाले स्थानीय रील मेकर्स और इन्फ्लुएंसर्स की एक ‘सस्पेक्ट लिस्ट’ (डेटाबेस) तैयार करेगी। इनके सोशल मीडिया हैंडल्स पर पुलिस 24 घंटे बैकएंड से नजर रखेगी। ट्रांसपोर्ट अथॉर्टी से परमानेंट ब्लैकलिस्टिंग: एसटीएफ सीधे परिवहन विभाग के साथ समन्वय करेगी। बार-बार स्टंट में शामिल पाए जाने वाले वाहनों का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और आरोपियों का ड्राइविंग लाइसेंस न केवल सस्पेंड करवाया जाएगा, बल्कि उन्हें हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश भी की जाएगी। ताकि वे भविष्य में कोई नया वाहन न खरीद सकें। हेल्पलाइन डेस्क पर शिकायत: आम जनता को इस टास्क फोर्स से जोड़ने के लिए हेल्प डेस्क बनाई गई है। इसके जरिए नागरिक सड़क पर हुड़दंग करने वालों का वीडियो बनाकर सीधे एसटीएफ को गुप्त रूप से भेज सकेंगे, जिस पर तुरंत एक्शन लिया जाएगा। आम जनता की सुरक्षा सर्वोपरि
डीसीपी ट्रैफिक प्रतीक गहलोत का कहना है कि शहर की सड़कें आम नागरिकों के सुरक्षित सफर के लिए हैं, न कि किसी के मनोरंजन या रील बनाने का अखाड़ा। इस कदम से न केवल सड़क हादसों में कमी आएगी, बल्कि कानून का खौफ भी बढ़ेगा। आम जनता और अभिभावकों से भी अपील की है कि वे अपने बच्चों को इस तरह की जानलेवा रीलबाजी और स्टंटबाजी से दूर रखें, क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही न सिर्फ जेल पहुंचा सकती है, बल्कि किसी की जिंदगी भी खत्म कर सकती है। फोटो में देखिए गुरुग्राम में सड़कों पर होने वाली स्टंटबाजी के दृश्य………………1
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