गुरदासपुर के लोकल बाटा चौक स्थित खुशी मार्केट में आज घर से काम पर आए एक 40 साल के सब्जी विक्रेता की दुकान पर पहुंचते ही हार्ट अटैक से मौत हो गई। मौके पर पहुंची सरकारी एम्बुलेंस कर्मियों के रवैये ने लोगों और दुकानदारों को आक्रोश से भर दिया। मृतक युवक की पहचान सोनी, निवासी गांव भब्बरी के रूप में हुई है, जो बाजार में सब्जी की दुकान चलाता था। चश्मदीदों और दुकानदारों ने बताया कि वह रोज की तरह आज सुबह ही घर से काम के लिए निकला था। जैसे ही वह दुकान के पास पहुंचा और उसने अपना सामान रखा, अचानक उसके सीने में तेज दर्द उठा। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, वह वहीं जमीन पर गिर पड़ा। भीषण गर्मी के चलते उसे मौके पर ही इतना जोरदार साइलेंट अटैक आया कि उसकी तुरंत मौत हो गई। बाजार के दुकानदारों ने की बचाने की कोशिश
खुशी मार्केट के ‘विश्वकर्मा कंप्यूटर वर्ल्ड’ के मालिक प्रिंस गुरजेंद्र सिंह ने बताया कि उसने अभी दुकान खोली ही थी कि बाजार में शोर मच गया। हम सभी दुकानदार तुरंत मौके पर भागे। वहां सोनी बेसुध पड़ा था। सभी दुकानदारों ने मिलकर उसे तुरंत प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) देने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने भी उसे मृत घोषित कर दिया। एम्बुलेंस चालक ने खड़े किए हाथ
घटना के तुरंत बाद दुाकनदारों ने गुरदासपुर सिटी पुलिस स्टेशन और सरकारी एम्बुलेंस को फोन किया। दुकानदारों ने गुरदासपुर सिटी पुलिस की मुस्तैदी की जमकर तारीफ की। पुलिस सूचना मिलते ही बेहद कम समय में मौके पर पहुंच गई और अपनी कानूनी कार्रवाई शुरू की। हालांकि मौके पर पहुंची एम्बुलेंस के कर्मचारियों ने शव को ले जाने से साफ इन्कार कर दिया। एम्बुलेंस कर्मियों की दलील थी कि गाइडलाइंस और नियमों में डेड बॉडी को ले जाना शामिल नहीं है, हम केवल मरीजों को ले जाते हैं। यह कहकर एम्बुलेंस वहां से रवाना हो गई। 2 घंटे तक धूप में पड़ा रहा शव, भड़के लोग
एम्बुलेंस के चले जाने के बाद करीब डेढ़ से दो घंटे तक मृतक का शव बाजार में ही पड़ा रहा, जिसे देखकर स्थानीय लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। स्थानीय निवासी राकेश कुमार और अन्य दुकानदारों ने सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह एक इंसान के शव का सीधा अपमान है। अगर कोई जीवित व्यक्ति घायल हो, तभी सरकारी एम्बुलेंस उसे छुएगी? मृत शरीर को क्या ऐसे ही सड़क पर लावारिस छोड़ दिया जाएगा? क्या पुलिस अब अपनी पेट्रोलिंग गाड़ी में शव लेकर जाएगी? ग्रामीणों और दुकानदारों ने मांग की है कि यदि सरकार की मौजूदा एम्बुलेंस शवों को नहीं उठाती, तो प्रशासन को तुरंत ‘शव वाहन’ या ‘डेड बॉडी एम्बुलेंस’ के लिए अलग से हेल्पलाइन नंबर जारी करना चाहिए ताकि ऐसी संवेदनशील परिस्थितियों में परिजनों और जनता को परेशान न होना पड़े। बाजार के लोगों ने दिखाया मानवीय चेहरा
दुकानदारों ने ऐलान किया है कि मृतक के परिजनों को सूचित कर दिया गया है। यदि प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई दूसरी गाड़ी शव को ले जाने के लिए नहीं आती है, तो पूरा बाजार संघ एकजुट होकर अपने खर्च और निजी वाहनों से सोनी के शव को उसके पैतृक गांव भब्बरी तक सम्मानपूर्वक पहुंचाएगा। लेकिन, उसके बाद मौके पर पहुंचे शव वाहन में लाश को सिविल अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
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