कैथल में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी संदीप कौर की अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। आरोपी पक्ष की तरफ से केस की पैरवी एडवोकेट अजय गुप्ता और अर्पित गुप्ता ने की। श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी लिमिटेड ने धारा 138/142 नैगोशेबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत सूबे सिंह पुत्र रामचंदर, निवासी मोहल्ला बोधाणीमा वाली चौपाल, कैथल के खिलाफ 14 नवंबर 2019 में न्यायालय में शिकायत दायर की थी। आसान मासिक किस्तों में चुकाना था लोन शिकायतकर्ता कंपनी द्वारा अपनी शिकायत में कहा गया कि आरोपी सूबे सिंह ने अपने वाहन पर लोन प्राप्त करने के उद्देश्य से शिकायतकर्ता कंपनी से संपर्क किया था। जिसे कंपनी द्वारा 4 लाख 80 हजार रुपए का लोन स्वीकृत किया गया। उक्त ऋण को आसान मासिक किस्तों में चुकाया जाना था और अभियुक्त ने ब्याज सहित उक्त किश्तों का भुगतान करने का वचन दिया था, लेकिन उसने अधिकांश किश्तों का भुगतान नहीं किया। चेक अस्वीकार हो गया सूबे सिंह ने शिकायतकर्ता श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी लिमिटेड से प्राप्त ऋण के संबंध में शिकायतकर्ता के पक्ष में एक चेक 11 सितंबर 2019 को 4 लाख 80 की राशी का जारी किया। फाइनेंस कंपनी ने अपनी शिकायत में कहा कि आरोपी सूबे सिंह द्वारा दिया गया चेक फंडस इनसफिसियेंट (पर्याप्त धनराशि उपलब्ध) न होने के कारण अस्वीकार हो गया। बचाव पक्ष से एडवोकेट ने अदालत में अपनी दलील में कहा कि सूबे सिंह ने शिकायतकर्ता कंपनी से कभी कोई ऋण प्राप्त नहीं किया था। विवादित चेक पर अभियुक्त के हस्ताक्षर नहीं हैं। ऋण के लिए आवेदन करते समय शिकायतकर्ता कंपनी के अधिकारियों ने अभियुक्त से कई कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिए थे, जिनका बाद में दुरुपयोग किया गया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने निर्णय दिया कि शिकायतकर्ता फाइनेंस कंपनी कानूनी रूप से सूबे सिंह पर ऋण साबित करने में विफल रही। जिसके चलते संदेह का लाभ देते हुए, न्यायालय ने आरोपी सूबे सिंह को धारा 138 के तहत सबूतों के अभाव में आरोपों से बरी कर दिया।
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कैथल में चेक बाउंस मामले में आरोपी बरी:कोर्ट ने दिया संदेह का लाभ, फाइनेंस कंपनी लोन साबित नहीं कर सकी
