करनाल जिले के तरावड़ी क्षेत्र में हैफेड के धान घोटाले का बड़ा मामला सामने आया है। कस्टम मिलिंग के लिए दिए गए धान में हजारों क्विंटल की कमी मिलने पर विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए राइस मिलर और उसके जमानतदारों के खिलाफ केस दर्ज कराया है। जांच में करोड़ों के सरकारी स्टॉक में गड़बड़ी और नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 48483 क्विंटल धान दिया, 3093 क्विंटल निकला कम
जिला प्रबंधक हैफेड करनाल की ओर से दी गई शिकायत के अनुसार, वर्ष 2025-26 की धान मिलिंग नीति के तहत तरावड़ी स्थित एक राइस मिल को कस्टम मिलिंग के लिए 48483.779 क्विंटल धान दिया गया था। नियमानुसार मिलर को इस धान से तैयार चावल भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को देना था।
5 मई 2026 को फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान स्टॉक की जांच की गई तो भारी गड़बड़ी सामने आई। जांच में पाया गया कि मिल में 23 हजार 100 क्विंटल धान स्टॉक में था, जबकि एफसीआई को केवल 3 हजार 480 क्विंटल चावल ही दिया गया था। इसके अलावा 11 हजार 454.167 क्विंटल चावल का स्टॉक मिला। जांच में कुल 3 हजार 093.97 क्विंटल धान की कमी पाई गई। नोटिस के बावजूद नहीं दिया जवाब
जांच के बाद हैफेड कार्यालय ने बीती 25 मई और 30 मई को राइस मिल को कारण बताओ नोटिस जारी किए। साथ ही जमानतदारों को भी नोटिस भेजे गए। इन नोटिसों में मिलर को निर्देश दिया गया कि वह तय समय के भीतर चावल की आपूर्ति पूरी करे या कमी की भरपाई करे। इसके बावजूद मिलर और उसके जमानतदारों ने न तो चावल जमा कराया और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया। विभाग का कहना है कि बार-बार मौखिक और लिखित निर्देश देने के बावजूद आरोपियों ने सहयोग नहीं किया। साजिश के तहत गड़बड़ी करने का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि मिल मालिक और जमानतदारों ने आपस में मिलकर साजिश के तहत यह गड़बड़ी की। विभाग का आरोप है कि मिल संचालक ने जानबूझकर धान का दुरुपयोग किया और सरकारी स्टॉक को हड़प लिया। मामले में मुख्य आरोपी के रूप में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी ओम गोयल का नाम सामने आया है, जो तरावड़ी स्थित ए.जी. कंपनी का मालिक है। आरोप है कि उसने समझौते के बावजूद चावल की आपूर्ति नहीं की और सरकारी नियमों का उल्लंघन किया। 92 लाख से ज्यादा का नुकसान
विभागीय गणना के अनुसार 3093.97 क्विंटल धान की कीमत करीब 92 लाख 32 हजार 818 रुपए आंकी गई है। यह राशि बीती 10 जून तक की स्थिति के आधार पर तय की गई है। हैफेड का कहना है कि इस गड़बड़ी से सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान हुआ है और यह सीधा-सीधा धोखाधड़ी और अमानत में खयानत का मामला है। इन लोगों पर दर्ज हुआ केस
पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इनमें गाजियाबाद निवासी ओम गोयल, जो ए.जी. कंपनी का मालिक है, मुख्य आरोपी है। इसके अलावा करनाल क्षेत्र के कमल कपूर, जो चिराग ट्रेडर्स के संचालक हैं और कमीशन एजेंट के रूप में काम करते हैं, तथा फकीर चंद, जो गुरु दक्षिणा ट्रेडिंग कंपनी के संचालक हैं, को जमानतदार के रूप में आरोपी बनाया गया है। पुलिस के अनुसार इन सभी ने मिलकर सरकारी स्टॉक में गड़बड़ी की और नुकसान पहुंचाया। समझौता 1 अक्टूबर 2025 को हुआ था
रिकॉर्ड के अनुसार ए.जी. कंपनी ने 1 अक्टूबर 2025 को हैफेड के साथ समझौता किया था। इस समझौते के तहत कंपनी को धान मिलिंग का काम दिया गया था और उसे तैयार चावल एफसीआई को देना था। लेकिन जांच में सामने आया कि कंपनी ने इस समझौते का पालन नहीं किया और निर्धारित नियमों का उल्लंघन किया। दस्तावेज विभाग के पास सुरक्षित
हैफेड कार्यालय ने बताया कि इस पूरे मामले से जुड़े सभी मूल दस्तावेज उनके पास सुरक्षित हैं। जरूरत पड़ने पर इन्हें जांच एजेंसियों को सौंपा जाएगा। विभाग का कहना है कि यह मामला गंभीर आर्थिक अपराध से जुड़ा है और इसमें सख्त कार्रवाई की जाएगी। 30 जून को दर्ज हुआ मुकदमा
मामले की जांच के बाद थाना तरावड़ी में 30 जून को मुकदमा दर्ज किया गया। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
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