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कुंजपुरा स्थित खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के गोदाम में सामने आए करोड़ों रुपये के गेहूं घोटाले में अब आरोप-प्रत्यारोप के बीच नया खुलासा हुआ है। मामले में पहले से घिरे पूर्व इंस्पेक्टर अशोक शर्मा ने वीडियो में खुलासा किया है तथा खुद को निर्दोष बताते हुए विभागीय अधिकारियों और मौजूदा कस्टोडियन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जांच में लगातार बढ़ती गेहूं बैगों की संख्या और कार्रवाई में देरी को लेकर भी उन्होंने सवाल खड़े किए हैं, जिससे पूरे प्रकरण की निष्पक्षता पर बहस तेज हो गई है। जांच में बढ़ती गई बैगों की संख्या, उठे सवाल
अशोक शर्मा ने अपने वीडियो में बताया कि शुरुआत में उन पर करीब 5 हजार गेहूं के बैग गायब करने का आरोप लगाया गया था, जबकि उस समय गोदाम की जिम्मेदारी उनके पास नहीं थी। इसके बाद विजिलेंस जांच में यह संख्या बढ़कर करीब 9500 बैग हो गई और विभागीय जांच में 9951 बैग कम पाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि हर बार आंकड़े बढ़ते गए, लेकिन जिम्मेदारी तय करने में पारदर्शिता नहीं बरती गई और अब पूरे मामले का ठीकरा उनके सिर फोड़ा जा रहा है। 3 जुलाई को सस्पेंशन, 8 जुलाई को बदली ड्यूटी
वीडियो में शर्मा ने बताया कि 3 जुलाई को 40 क्विंटल गेहूं के कथित गबन के आरोप में उन्हें निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद 8 जुलाई को उन्होंने चंडीगढ़ स्थित निदेशक कार्यालय में कार्यभार संभाल लिया और वहीं से वेतन प्राप्त करते रहे। उनके अनुसार, उनके स्थान पर गोदाम का कस्टोडियन मुकेश गुप्ता को बनाया गया था। ऐसे में उनके बाद की किसी भी कमी के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना गलत है। ‘मेरी अनुमति के बिना उठा गेहूं’
अशोक शर्मा का कहना है कि गोदाम से जितना भी गेहूं गायब हुआ, वह उनकी अनुमति के बिना उठाया गया। उन्होंने साफ कहा कि जब वह उस समय गोदाम की जिम्मेदारी में ही नहीं थे, तो फिर उन पर आरोप कैसे लगाए जा रहे हैं। कस्टोडियन पर 3 करोड़ का गेहूं बेचने का आरोप
वीडियो में शर्मा ने तत्कालीन एफएसओ एवं कस्टोडियन मुकेश गुप्ता पर करीब 3 करोड़ रुपये का गेहूं बेचने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि 24 जून को निदेशक स्तर की जांच में भी मुकेश गुप्ता को जिम्मेदार माना गया था और कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों के साथ मिलीभगत के कारण कार्रवाई दबा दी गई। संपत्ति जांच की मांग, लगाए बड़े आरोप
अशोक शर्मा ने सरकार से मुकेश गुप्ता की संपत्ति की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास केवल एक मकान है, जिसे उन्होंने वर्ष 2012 में बैंक लोन लेकर खरीदा था। वहीं उन्होंने आरोप लगाया कि मुकेश गुप्ता के पास सेक्टर-8 में दो मंजिला कोठी, विभिन्न सेक्टरों में कई प्लॉट और अन्य संपत्तियां हैं, जिनमें से अधिकतर परिजनों के नाम पर खरीदी गई हैं। 25 लाख लेकर भी नहीं रुकी कार्रवाई
वीडियो में शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि उनके खिलाफ पहले सितंबर 2025 में और अब दोबारा झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया। उन्होंने कहा कि एएफएसओ समेत कुछ अधिकारियों ने मामला दबाने के नाम पर उनसे 25 लाख रुपये तक ले लिए। यह रकम उन्होंने 6 अगस्त को अपने ईपीएफ और रिश्तेदारों से उधार लेकर दी थी। इसके बावजूद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई। डीजीपी से मिलकर भी नहीं हुई जांच
अशोक शर्मा के अनुसार, पहले दर्ज हुए मामले के बाद उन्होंने 2 जनवरी 2026 को हरियाणा के डीजीपी से मिलकर पूरे मामले की जानकारी दी थी। इसके बाद डीजीपी कार्यालय की ओर से पुलिस को चार बार पत्र भेजकर जांच के निर्देश दिए गए, लेकिन आज तक कोई ठोस जांच नहीं हुई। उन्होंने इसे भी सिस्टम की लापरवाही करार दिया। छह माह से घर पर, फिर भी बनाया जा रहा दोषी
वीडियो में भावुक होते हुए शर्मा ने कहा कि वह पिछले छह माह से घर पर हैं और लगभग एक वर्ष से संबंधित फील्ड में कार्यरत नहीं हैं। इसके बावजूद उन्हें बार-बार घोटाले का जिम्मेदार ठहराया जा रहा है और झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। एएफएसओ मुकेश गुप्ता ने आरोपों को बताया गलत
इस मामले में जब एएफएसओ मुकेश गुप्ता से बात की गई तो उन्होंने सभी आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि सभी सबूतों के आधार पर ही अशोक शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई है। 25 लाख रुपये लेने की बात भी गलत है। अगर ऐसा होता तो मामला उसी समय सामने आ जाता, एक साल बाद नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि अशोक शर्मा ने अब तक रिकॉर्ड नहीं सौंपा है, जिसको लेकर कई बार पत्राचार किया जा चुका है। कार्रवाई पर उठ रहे बड़े सवाल
गेहूं घोटाले में एक ओर जहां जांच में बैगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदारी तय करने को लेकर विभागीय कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं। पूर्व इंस्पेक्टर और मौजूदा अधिकारी के बीच खुलेआम आरोप-प्रत्यारोप ने पूरे मामले को और उलझा दिया है। ऐसे में अब निष्पक्ष और पारदर्शी जांच ही सच्चाई सामने ला सकती है।
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करनाल के गेहूं घोटाले में पलटा आरोपों का खेल:पूर्व इंस्पेक्टर का वीडियो वायरल, विभागीय कार्रवाई पर उठाए उन्होंने सवाल







