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करनाल के कोहंड में स्कूल निर्माण पर विवाद:ग्रामीणों की खींचतान से 3.60 करोड़ का बजट टेंडर से पहले अटका; बरामदों में लग रहीं क्लास




करनाल जिला में कोहंड गांव के प्राइमरी स्कूल की नई बिल्डिंग के लिए पास हुआ करीब 3.60 करोड़ रुपए का बजट टेंडर प्रक्रिया तक भी पहुंचता नजर नहीं आ रहा है। गांव में दो पक्षों के बीच इस बात को लेकर खींचतान है कि स्कूल नई चिन्हित जमीन पर बने या मौजूदा जगह पर ही नई बिल्डिंग तैयार की जाए। इस खींचतान का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और स्कूल के माहौल पर पड़ रहा है। फिलहाल पंचायत ने दोबारा प्रस्ताव पास कर पुरानी जगह पर ही बिल्डिंग निर्माण के लिए लिखा है। मामला दोबारा विभाग के मुख्यालय तक पहुंच गया है और फिजिबिलिटी रिपोर्ट भी मुख्यालय तक जा चुकी है। अब अंतिम फैसला मुख्यालय का होगा। ग्रामीण बोले- नई जगह पर बने स्कूल, तभी सुधरेगी व्यवस्था गांव के महेंद्र सिंह, विक्रम, रामदास, मुकेश, सतीश, अजय सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि मौजूदा स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे अधिकतर गरीब परिवारों से हैं और वे पहले से ही संसाधनों की कमी झेल रहे हैं। ऐसे में बारिश के समय स्कूल में जलभराव होना बच्चों की पढ़ाई के साथ खिलवाड़ है। गंदे नाले का गंदा पानी मक्खी मच्छरों को बढ़ावा देता है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। कई बार हालात इतने खराब हो जाते हैं कि पानी हेडमास्टर के ऑफिस तक पहुंच जाता है और मजबूरी में स्कूल की छुट्टी करनी पड़ती है। पानी निकालने के लिए पंप का सहारा लेना पड़ता है, जिसमें 3 से 4 घंटे लग जाते हैं। जिससे पढाई भी प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि पंचायत पहले ही नई जगह पर जमीन दे चुकी है, इसलिए वहीं पर स्कूल का निर्माण होना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी समस्या न आए। 15 कमरों में 500 से ज्यादा बच्चे, बरामदों में लग रही क्लास स्कूल के हेड मास्टर हरीदत्त के अनुसार, जीपीएस कोहंड में इस समय 15 कमरे हैं, जबकि 500 से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं। जगह की कमी के कारण कई बच्चों को बरामदों में बैठाकर पढ़ाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि सीएम अनाउंसमेंट के तहत नई बिल्डिंग के लिए पंचायत ने करीब सवा एकड़ जमीन दी है, जहां 20 कमरे और सभी मूलभूत सुविधाओं के साथ नया स्कूल बन सकता है। स्कूल का मौजूदा स्थान नाले के साथ होने के कारण हर बारिश में जलभराव की समस्या पैदा करता है, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है। पंचायत ने खेल मैदान की जमीन दी, लेकिन उठे सवाल गांव के सरपंच प्रतिनिधि सुनील कुमार उर्फ बाबूराम ने बताया कि स्कूल की समस्या काफी पुरानी है। नाले का गंदा पानी स्कूल में घुसने से बच्चों को परेशानी होती थी। इसको देखते हुए पंचायत ने खेल मैदान की जमीन एजुकेशन डिपार्टमेंट को ट्रांसफर कर दी ताकि बेहतर स्कूल बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद करीब चार महीने पहले बजट भी पास हो गया था। लेकिन कुछ ग्रामीणों ने आपत्ति जताई कि नई जगह श्मशान घाट और जोहड़ के पास है। इस पर सरपंच ने स्पष्ट किया कि जोहड़ साफ पानी का है और श्मशान सड़क के पार स्थित है। इसके बावजूद कुछ लोग पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर वहीं नया स्कूल बनाने की मांग कर रहे हैं। दो प्रस्ताव भेजे गए, अब विभाग करेगा फैसला मामला बढ़ने के बाद पंचायत ने दूसरा प्रस्ताव भी विभाग को भेज दिया। जहां पहला प्रस्ताव नई जगह पर स्कूल बनाने का था, जबकि दूसरा मौजूदा स्थान पर दो या तीन मंजिला बिल्डिंग बनाने का है। इसके चलते मामला और उलझ गया है और अब अंतिम निर्णय विभाग के मुख्यालय स्तर पर लिया जाएगा। इंजीनियर बोले- पुरानी जगह पर निर्माण संभव नहीं एसएसए सिविल विंग के जेई निशांत राणा के अनुसार, स्कूल को नई जगह शिफ्ट करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी और फिजिबिलिटी रिपोर्ट के आधार पर 3.60 करोड़ रुपए का बजट भी पास हो चुका है। लेकिन कुछ ग्रामीणों की मांग के चलते दोबारा फिजिबिलिटी रिपोर्ट भेजी गई है। उन्होंने बताया कि मौजूदा स्कूल बहुत कम जगह पर बना है और जमीन भी अनियमित आकार की है। साथ ही स्कूल के पास सिंचाई विभाग का नाला है और करीब 191 वर्ग मीटर जमीन पर स्कूल का अवैध कब्जा है। इसको लेकर सिंचाई विभाग ने 20 अप्रैल को नोटिस जारी कर सात दिन के अंदर जमीन खाली करने के निर्देश दिए थे। यदि जमीन खाली नहीं की जाती तो कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरता पुराना स्थान जेई निशांत राणा ने कहा कि यदि अवैध कब्जा हट जाता है तो स्कूल के पास केवल 1800 गज जमीन बचती है, जो सुरक्षा मानकों के अनुसार बिल्डिंग बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने बताया कि अगर यहां डबल या ट्रिपल स्टोरी बिल्डिंग बनाई भी जाती है तो आग लगने जैसी आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड का प्रवेश मुश्किल होगा। न वेंटिलेशन की पर्याप्त जगह होगी और न ही बच्चों के खेलने का मैदान। डीईओ बोले- नई जगह ही बेहतर विकल्प करनाल के डीईओ रोहताश कुमार वर्मा ने बताया कि पंचायत द्वारा दी गई नई जमीन पर स्कूल बनाने का एस्टीमेट पहले ही पास हो चुका है, लेकिन टेंडर प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत का एक और प्रस्ताव आया है जिसमें मौजूदा स्थान पर ही नई बिल्डिंग बनाने की बात कही गई है। वर्मा के अनुसार, मौजूदा जगह पर बिल्डिंग बनाना व्यावहारिक नहीं है क्योंकि वहां पर्याप्त स्थान नहीं है। फिर भी विभाग ने दोनों प्रस्तावों की फिजिबिलिटी रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी है। अंतिम निर्णय वहीं से लिया जाएगा, लेकिन विभाग की प्राथमिकता नई जगह पर स्कूल बनाना है। बच्चों का भविष्य दांव पर, जल्द निर्णय की जरूरत कोहंड गांव के प्राइमरी स्कूल को लेकर चल रही यह खींचतान अब बच्चों के भविष्य पर असर डालने लगी है। एक तरफ जहां बजट पास होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा, वहीं दूसरी तरफ खराब हालात में बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं। अब सभी की नजर मुख्यालय के फैसले पर टिकी है कि आखिर स्कूल नई जगह बनेगा या पुराने स्थान पर ही समाधान निकाला जाएगा।



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