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एशियन चैंपियन दीक्षा दलाल ने रचा इतिहास:बहादुरगढ़ लौटीं दीक्षा का हुआ स्वागत,सोनू अखाड़े के तीन पहलवान भी एशियन गेम्स के लिए चयनित




झज्जर जिले की बेटियां लगातार अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन कर रही हैं। इसी कड़ी में बहादुरगढ़ की 15 वर्षीय महिला पहलवान दीक्षा दलाल ने एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया है। दीक्षा की इस उपलब्धि से न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। वहीं, हिन्द केसरी सोनू अखाड़े के लिए एक और बड़ी उपलब्धि यह रही कि अखाड़े के तीन पहलवानों सुमित दलाल, रजत रूहल और दीपक का चयन आगामी एशियन गेम्स के लिए हुआ है। वियतनाम से गोल्ड मेडल जीतकर लौटने के अगले ही दिन दीक्षा फिर से मैट पर अभ्यास करती नजर आईं। अखाड़े में पहुंचने पर एशियन चैंपियन दीक्षा और एशियन गेम्स के लिए चयनित खिलाड़ियों का फूल-मालाओं और ढोल-नगाड़ों के साथ जोरदार स्वागत किया गया। इस अवसर पर दीक्षा के दादाजी ने खिलाड़ियों, कोचों और ग्रामीणों को मिठाई खिलाकर खुशी साझा की। जहां उतरीं, वहां जीता सिर्फ सोना साल 2021 से हिन्द केसरी सोनू अखाड़े में प्रशिक्षण ले रही दीक्षा दलाल की उपलब्धियां किसी प्रेरणादायक कहानी से कम नहीं हैं। 22 किलो भार वर्ग से अपने करियर की शुरुआत करने वाली दीक्षा आज 47 किलो वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। खास बात यह है कि उन्होंने अब तक जिस भी स्तर पर प्रतियोगिता खेली, वहां गोल्ड मेडल अपने नाम किया। वर्ष 2019-20 से लेकर 2025-26 तक जिला स्तर पर लगातार स्वर्ण पदक जीतने वाली दीक्षा पिछले सात वर्षों से राज्य चैंपियन बनी हुई हैं। 2023-24 में पहली बार राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उतरीं और वहां भी गोल्ड जीतकर सबको चौंका दिया। इसके बाद से वह लगातार राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीत रही हैं। राष्ट्रीय चैंपियन बनने के बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेलने का मौका मिला और उन्होंने लगातार तीसरा अंतरराष्ट्रीय गोल्ड जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। दीक्षा ने अपनी सफलता का श्रेय दादाजी, परिवार और कोचों को देते हुए कहा कि उनका सपना ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। अखाड़े के तीन सितारे एशियन गेम्स में दिखाएंगे दम दीक्षा की सफलता के साथ हिन्द केसरी सोनू अखाड़े के तीन अन्य पहलवानों ने भी बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सुमित दलाल, रजत रूहल और दीपक का चयन एशियन गेम्स के लिए हुआ है। सुमित दलाल हाल ही में वर्ल्ड रैंकिंग सीरीज में भाग लेने के लिए मंगोलिया रवाना हुए हैं। सुमित ने 2025 और 2026 की एशियाई चैंपियनशिप में लगातार दो स्वर्ण पदक जीते हैं। इसके अलावा 2025 की रैंकिंग सीरीज में सिल्वर मेडल जीतते हुए कई विश्वस्तरीय और ओलंपियन पहलवानों को मात दी। वह अंडर-20 विश्व चैंपियनशिप में सिल्वर, अंडर-23 में ब्रॉन्ज और अंडर-20 में भी ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके हैं। सुमित छह बार राष्ट्रीय चैंपियन रह चुके हैं और उनके नाम 12 राष्ट्रीय पदक दर्ज हैं। दंगल और मैट दोनों के उस्ताद हैं रजत हैवीवेट फ्री स्टाइल पहलवान रजत रूहल ने भी एशियन गेम्स का टिकट हासिल कर लिया है। रजत जूनियर एशिया कप 2023 में ब्रॉन्ज और 2024 में सिल्वर मेडल जीत चुके हैं। इसके अलावा जूनियर वर्ल्ड कप 2023 में भी उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया था। रजत की पहचान केवल मैट तक सीमित नहीं है, बल्कि मिट्टी के दंगलों में भी उनका दबदबा है। वह 8 से 9 बार भारत केसरी का खिताब जीत चुके हैं और बड़े दंगलों में पहली छुट्टी के सबसे पसंदीदा पहलवानों में गिने जाते हैं। वहीं ग्रीको रोमन स्पर्धा के पहलवान दीपक ने भी एशियन गेम्स के लिए क्वालिफाई कर अखाड़े और क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। एक ओर दीक्षा दलाल ने एशियन चैंपियन बनकर देश का मान बढ़ाया है, वहीं दूसरी ओर अखाड़े के तीन खिलाड़ियों का एशियन गेम्स के लिए चयन यह साबित करता है कि हिन्द केसरी सोनू अखाड़ा आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवान तैयार करने वाली बड़ी नर्सरी बन चुका है। खिलाड़ियों और कोचों का लक्ष्य अब एशियन गेम्स और ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।



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