हरियाणा के अंबाला में एक महिला ने डॉक्टर पर इलाज के बहाने छेड़छाड़ और अश्लील हरकतें करने का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि वह सायटिका (कमर से लेकर पांव तक दर्द रहना) के इलाज के लिए डॉक्टर के पास गई थी। पहले तो डॉक्टर ने उसे क्लिनिक में ही देखा। फिर क्लिनिक में बने अलग कमरे में जांच के लिए बुलाया। आरोप है कि कमरे में जाने पर डॉक्टर ने उसे कपड़े उतारने के लिए कहा। उसने मना किया तो डॉक्टर ने सलाह दी कि ऐसे इलाज नहीं होगा, मालिश करनी होगी। आरोप है कि डॉक्टर ने उसकी टांग की मालिश करने के बहाने उसके प्राइवेट पार्ट को छुआ। डॉक्टर की गलत मंशा जानकर उसने शोर मचा दिया। इस पर डॉक्टर ने उसकी पिटाई भी की। इसके बाद वह किसी तरह कमरे से बाहर निकल गई। कमरे से बाहर आने के बाद महिला ने अपने परिवार और पुलिस को मामले की जानकारी दी। महिला ने इसका एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी डाला है, जिसमें वह डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई में उसका साथ देने की मांग कर रही है। उधर, पुलिस ने महिला की शिकायत पर आरोपी डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। यहां सिलसिलेवार ढंग से जानिए महिला ने क्या आरोप लगाए… आरोपी डॉक्टर की तलाश कर रही पुलिस पंजोखरा थाना प्रभारी जय सिंह ने बताया कि आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। उन्होंने बताया कि आरोपी डॉक्टर फरार है, जिसकी तलाश शुरू कर दी गई है। उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी वास्तव में डॉक्टर है या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए। पुलिस स्वास्थ्य विभाग से इसकी भी जानकारी जुटाएगी। क्या है सायटिका, जिसका इलाज कराने महिला आई थी, ग्राफिक्स में जानिए… सायटिका क्या होता है? यह कॉमन कमर दर्द से अलग कैसे है? डॉक्टर्स की माने तो हमारे शरीर में अरबों नर्व्स होती हैं। ये शरीर की कम्युनिकेशन लाइन हैं। ये दिमाग और शरीर के अलग-अलग हिस्सों के बीच संदेश पहुंचाने का काम करती हैं। शरीर की सबसे लंबी और मोटी नर्व सायटिक है। यह कमर से शुरू होकर कूल्हे, जांघ, घुटने और पिंडली से होते हुए पैर के तलवे तक जाती है। जब इसमें किसी कारण से अतिरिक्त दबाव पड़ता है तो दर्द होता है। इसे सायटिकी कहते हैं। यह कोई बीमारी नहीं है। यह नर्व पर दबाव पड़ने से उभरा एक लक्षण है। कॉमन कमर दर्द और इसमें ये फर्क है कि कमर दर्द सिर्फ कमर तक सीमित रहता है, जबकि इसका दर्द कमर से शुरू होकर पैर के तलवे तक फैलता है। सायटिका का दर्द कैसा महसूस होता है? सायटिका का दर्द जलन, करंट के झटके या तेज चुभन जैसा होता है। यह दर्द कमर के निचले हिस्से से शुरू होकर नितंब, जांघ के पीछे, घुटने के नीचे और कभी-कभी पैर की उंगलियों तक जाता है। खांसने, छींकने, झुकने या लंबे समय तक बैठने पर यह दर्द बढ़ जाता है। कुछ लोगों को इसमें झुनझुनी या सुई की चुभन जैसा एहसास होता है। कुछ को सुन्नपन भी महसूस होता है। अगर दर्द हल्का हो तो चलने-फिरने में दिक्कत नहीं होती, लेकिन तेज दर्द में पैर उठाना भी मुश्किल हो जाता है। यह दर्द आमतौर पर शरीर के एक तरफ होता है। सायटिका की समस्या क्यों होती है? हमारी लाइफस्टाइल और इमोशंस से इसका क्या कनेक्शन है? सायटिका की मुख्य वजह सायटिक नर्व पर पड़ रहा अतिरिक्त दबाव है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। जैसे- हर्नियेटेड डिस्क (स्लिप डिस्क)- जब रीढ़ की डिस्क अपनी जगह से फिसल जाती है और इससे नर्व दब जाती है। डिजेनरेटिव डिस्क डिजीज- उम्र के साथ डिस्क घिसने से नर्व पर दबाव बढ़ता है। स्पाइनल स्टेनोसिस- स्पाइनल कैनाल (एक पाइप जैसे आकार की हड्डी, जिसमें स्पाइनल कॉर्ड और नर्व्स होती हैं) सिकुड़ जाने से सायटिक नर्व पर दबाव बढ़ता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस- हड्डियों पर पड़ रहा अतिरिक्त दबाव सायटिक नर्व को दबाता है।कुछ मामलों में चोट, प्रेग्नेंसी या ट्यूमर भी इसकी वजह हो सकते हैं। अनहेल्दी लाइफस्टाइल- लंबे समय तक बैठकर काम करने, भारी सामान उठाने और गलत पोश्चर के कारण इसका रिस्क बढ़ता है। मोटापा और कम फिजिकल एक्टिविटी से भी नर्व पर दबाव बढ़ता है। इसके अलावा स्मोकिंग के कारण भी सायटिका का रिस्क बढ़ता है। इमोशन भी है वजह- लंबे समय तक तनाव रहने से हॉर्मोनल असंतुलन होता है। इसके कारण मसल्स टाइट हो जाती हैं और स्पाइन पर लोड बढ़ता है। तनाव से नींद खराब होती है, जो ओवरऑल शरीर को हेल्दी रखने के लिए बहुत क्रिटिकल है। इन सारी चीजों का असर सायटिक नर्व पर पड़ता है। कुल मिलाकर स्ट्रेस भी सायटिका का एक बड़ा कारण है। किस उम्र में और किन लोगों को सायटिका का खतरा ज्यादा होता है? सायटिका किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन यह ज्यादातर 30 से 50 साल की उम्र में होता है। इस उम्र तक आते–आते पूरे शरीर के साथ–साथ रीढ़ का भी क्षरण शुरू होता है। डिस्क धीरे–धीरे कमजोर पड़ रही होती है। ऐसे में अगर हमारी आदतें, लाइफस्टाइल खराब है तो रिस्क बढ़ जाता है।
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