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Sirsa CDLU LLM Course Admission Notification


सिरसा की सीडीएलयू और लॉ डिपार्टमेंट का फाइल फोटो

सिरसा की चौ. देवीलाल यूनिवर्सिटी (CDLU) में मास्टर ऑफ लॉ (LLM) कोर्स शुरू करने के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से नोटिफिकेशन जारी हो गया है। एलएमएम का ये दो वर्षीय कोर्स शुरू होगा। इस कोर्स में दाखिले के लिए 15 जुलाई से आवेदन शुरू होंगे। अभी साइट पर

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यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस बार एलएलएम में दाखिला प्रक्रिया के लिए एंट्रेंस पेपर लागू कर दिया है। आवेदन के बाद पहले एंट्रेंस पेपर देना होगा और बाद में मैरिट लिस्ट बनेगी। उसी आधार पर दाखिला किया जाएगा। वरना पहले सीधा मैरिट बेस पर लिस्ट बनती थी और दाखिला हो जाता था। एंट्रेंस पेपर नहीं होता था।

इससे लॉ के इच्छुक विद्यार्थियों में खुशी का माहौल है और उनको दाखिले के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। इसे लेकर छात्र संगठनों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को 13 जुलाई तक का अल्टीमेटम दिया था और बड़े आंदोलन की चेतावनी दी थी। पहले ही प्रशासन ने कोर्स में दाखिले के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया। एक तरह से छात्रों की मांग के आगे यूनिवर्सिटी को झुकना पड़ा।

यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से एलएलएम में दाखिले के लिए जारी नोटिस

यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से एलएलएम में दाखिले के लिए जारी नोटिस

एचबीआई से हटा दिया था कोर्स

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने हैंडबुक इन्फॉर्मेशन (HBI) साइट से हटा दिया था। इससे छात्रों में रोष का माहौल बन गया था। छात्रों ने आरोप लगाया था कि यूनिवर्सिटी प्रशासन इस मास्टर लॉ कोर्स को बंद करना चाहता है। इसलिए इस बार कोई दाखिले नहीं किए जा रहे। लॉ के इच्छुक सभी विद्यार्थी परेशान है और दाखिले के लिए बाहर जाने काे मजबूर होंगे। जिले में कहीं भी एलएलएम कोर्स नहीं है। इसके विरोध में छात्रों ने मेन गेट के बाहर प्रदर्शन कर पुतला दहन किया था।

सीडीएलयू के बाहर प्रदर्शन के दौरान छात्र संगठन। फाइल फोटो

सीडीएलयू के बाहर प्रदर्शन के दौरान छात्र संगठन। फाइल फोटो

पिछले साल 30 सीटों पर 200 आवेदन आए थे छात्रों के अनुसार, पिछले साल एलएलएम में 30 सीटों पर 200 आवेदन आए थे। छात्रों के रूझान को देखते हुए 10 सीटें और बढ़ानी पड़ी थी। ऐसे में कुल 40 सीट हो गई। यह एलएलएम 2 वर्षीय कोर्स है। अब यूनिवर्सिटी प्रशासन एक साल के लिए शुरू की तैयारी कर रहा है।

मगर एक वर्षीय डिग्री की योग्यता पर सवाल खड़े होते हैं और उसकी इतनी वैल्यू नहीं होती। ऐसे छात्र नेट नहीं कर सकते, उनको पीएचडी करनी पड़ेगी। इसलिए छात्र हित में 2 वर्षीय कोर्स ही शुरू किया जाए।



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