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Punjab Lawyers Protest LADC Policy



पंजाब में लीगल एड डिफेंस काउंसिल नीति को लेकर वकीलों और राज्य सरकार के बीच खींचतान अब चरम पर पहुंच गई है। पिछले लगभग दो हफ्तों से अदालती कार्य का बहिष्कार कर रहे वकीलों ने अब अपने आंदोलन को और उग्र रूप दे दिया है।

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पंजाब की बार एसोसिएशंस की जॉइंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर पठानकोट सहित पूरे राज्य में अधिवक्ताओं ने अनिश्चितकालीन क्रमिक भूख हड़ताल की शुरुआत कर दी है। इस अनिश्चितकालीन आंदोलन के कारण अदालतों में मुकदमों की सुनवाई पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे आम जनता और वादकारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

क्या है वकीलों का आरोप और विरोध की मुख्य वजह? डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन पठानकोट के पदाधिकारियों ने LADC नीति के दुष्प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए राज्य सरकार और न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं:

1. युवा वकीलों की आजीविका पर बड़ा संकट वकीलों का तर्क है कि LADC व्यवस्था के तहत अदालतों में बहुत ही सीमित संख्या में सरकारी वकीलों को नियुक्त किया गया है, जो लगभग सभी आपराधिक मामलों की पैरवी कर रहे हैं। इससे निजी प्रैक्टिस करने वाले और विशेष रूप से युवा वकीलों का काम पूरी तरह छीन गया है, जिससे उनके सामने रोज़गार और भविष्य का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

2. अपराधियों को शह देने का आरोप वकीलों ने नीति के दोहराव पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ सरकार और पुलिस अपराधियों के खिलाफ मामले दर्ज करती है, वहीं दूसरी तरफ LADC नीति के तहत उन्हें सरकारी खर्च पर मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान की जाती है। इसका सीधा फायदा आदतन और पेशेवर अपराधियों को मिल रहा है, जिससे कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

आंदोलन की रूपरेखा: प्रतिदिन 5 वकील बैठेंगे भूख हड़ताल पर जॉइंट एक्शन कमेटी के दिशानिर्देशों के अनुसार आंदोलन को चरणबद्ध और योजनाबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है:

समय और रूपरेखा: हर दिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक बार एसोसिएशन के 5 सदस्य क्रमिक रूप से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठेंगे।

अदालती कामकाज ठप: आंदोलन के दौरान अदालतों में कोई भी अधिवक्ता पैरवी के लिए पेश नहीं हो रहा है। नियमित न्यायिक कार्य पूरी तरह से निलंबित है।

जारी रहेगा संघर्ष: वकीलों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सरकार LADC नीति में संशोधन या इसे वापस लेने पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, यह आंदोलन खत्म नहीं होगा।

यह लड़ाई सिर्फ वकीलों की नहीं, न्याय व्यवस्था की है बार एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि यह संघर्ष केवल अधिवक्ताओं की फीस या रोज़गार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता और समाज के व्यापक हितों को बचाने की लड़ाई है। यदि युवा वकीलों को काम नहीं मिलेगा, तो आने वाले समय में स्वतंत्र और निष्पक्ष विधिक व्यवस्था की नींव कमजोर होगी।



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