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Punjab Congress Leadership Announcement Today


सुखजिंदर सिंह रंधावा और चरणजीत चन्नी।

पंजाब कांग्रेस में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आज बड़ा बदलाव हो सकता है। कांग्रेस पंजाब प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को हटा सकती है। इसके लिए सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा और पूर्व सीएम व सांसद चरणजीत चन्नी को अचानक दिल्ली बुलाया गया है। यहां पार्टी

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कुछ दिन पहले राहुल गांधी ने 3 ऑब्जर्वरों की रिपोर्ट के बाद पंजाब के पांच शीर्ष नेताओं के साथ बैठक की थी। इसके बाद उन्होंने पंजाब के नेतृत्व को लेकर अपना निर्णय केसी वेणुगोपाल को सौंप दिया है। कांग्रेस सोर्सेज के मुताबिक अभी 3 नेता प्रधान पद की दौड़ में हैं, जिनमें रंधावा और चन्नी के साथ पूर्व सांसद विजयइंदर सिंगला भी शामिल हैं।

तीनों नेताओं का प्रधानगी पद पव दावा क्यों?

  • सुखजिंदर सिंह रंधावा: रंधावा जट्‌टसिख कम्युनिटी से आते हैं। अभी BJP के प्रधान केवल ढिल्लों और अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल जट्‌टसिख कम्युनिटी से ही हैं। AAP के प्रधान अमन अरोड़ा हिंदू हैं लेकिन पार्टी की ओवरऑल कमान जट्‌टसिख कम्युनिटी से आते सीएम भगवंत मान के पास ही है। अगर कांग्रेस भी जट्‌टसिख कम्युनिटी के साथ गई तो रंधावा अगले प्रधान हो सकते हैं।
  • चरणजीत चन्नी: चन्नी दलित कम्युनिटी से आते हैं। वह 2021 में पंजाब के करीब 100 दिन के मुख्यमंत्री भी रहे। हाल ही में उन्होंने सवाल उठाए थे कि पार्टी में हर बड़े पद पर जट्‌टसिख कम्युनिटी का कब्जा है। ऐसे में दलितों को कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा। अगर कांग्रेस दलित कम्युनिटी के साथ गई तो वह नए प्रधान हो सकते हैं।
  • विजयंइदर सिंगला: सिंगला राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं। वह सीएम भगवंत मान के गृह जिले संगरूर से सांसद रह चुके हैं। कांग्रेस अगर जट्‌टसिख और हिंदू कम्युनिटी का संतुलन बनाने की कोशिश करती है तो सिंगला प्रधान हो सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि कांग्रेस की तरफ से पंजाब विधानसभा के नेता विपक्ष अभी प्रताप सिंह बाजवा हैं, जो जट्‌टसिख कम्युनिटी से आते हैं।

अमरिंदर राजा वड़िंग का क्या होगा? चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में कांग्रेस हाईकमान इस समय किसी भी बड़े नेता को नाराज नहीं करना चाहेगा। इसलिए राजा वड़िंग को कैंपेन कमेटी में एडजस्ट किया जा सकता है। इसके अलावा प्रधानगी की दौड़ से बाहर बाकी नेताओं को भी इसी तरह किसी न किसी कमेटी का प्रमुख बनाकर उनकी जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

इस बदलाव पर पंजाब कांग्रेस में क्या माहौल:-

मनीष तिवारी बोले- सही टाइम नहीं

चंडीगढ़ से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने एक इंटरव्यू में कहा कि पंजाब में इस समय पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन का सही समय नहीं है। किसी भी प्रधान को रिजल्ट देने के लिए कम से कम 24 महीने का वक्त चाहिए जबकि पंजाब में चुनाव के लिए सिर्फ 6-7 महीने का समय बचा है। उन्होंने ये भी कहा कि पंजाब कांग्रेस में परिवर्तन के लिए हाईकमान ने 60-70 नेताओं को दिल्ली बुलाकर उनकी राय ली, लेकिन मुझे नहीं बुलाया गया। मैं पंजाब की राजनीति में पूरी तरह सक्रिय हैं और सांसद भी हूं।

सांसद गांधी बोले- कोई बगावत का डर दिखा रहा

पटियाला से कांग्रेस सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी ने बदलाव में देरी पर सवाल उठाए थे। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि पार्टी में कोई बड़ा बगावत का डर दिखा रहा है और पार्टी में बदलाव को टालने की कोशिश की जा रही है। यह पार्टी विरोधी है। हालांकि मामला मीडिया में आने के बाद उन्होंने पोस्ट डिलीट कर दी थी।

कांग्रेस में बदलाव की नौबत क्यों आ रही?

अमरिंदर राजा वड़िंग की प्रधानगी में कांग्रेस तरनतारन विधानसभा का उपचुनाव हार गई। नेताओं ने इसके लिए वड़िंग के पूर्व गृहमंत्री बूटा सिंह पर विवादित टिप्पणी को जिम्मेदार ठहराया। इसके बाद निकाय चुनावों में भी कांग्रेस की बुरी हार हुई। वड़िंग अपने गृह क्षेत्र गिद्दड़बाहा में भी कांग्रेस को नहीं जिता सके।

जिसके बाद कई नेताओं ने खुलकर कहा कि जो अपने गृहक्षेत्र में नहीं जिता सकता, वह पंजाब क्या जिताएंगे। जिसके बाद बदलाव की मांग तेज हो गई। इसी दौरान पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी ने भी दलितों को प्रतिनिधित्व न देने का मुद्दा उठा दिया।

माहौल गर्माने पर राहुल गांधी ने दिल्ली में पंजाब के कांग्रेस नेताओं से मीटिंग की। इसके बाद हाईकमान ने 3 ऑब्जर्वर नियुक्त किए थे, जिन्होंने दिल्ली में पंजाब के 60-70 वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर फीडबैक लिया। इस कमेटी में अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजन लाल जाटव शामिल थे। उन्होंने प्राप्त फीडबैक की रिपोर्ट तैयार कर हाईकमान को सौंप दी है।

इसके बाद राहुल गांधी व सोनिया गांधी ने प्रधान पद के 5 बड़े दावेदारों मौजूदा प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व उपमुख्यमंत्री व सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा और पूर्व मंत्री विजयइंदर सिंगला के साथ वन टु वन मीटिंग की।

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