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PM का भ्रामक VIDEO शेयर विवाद:चंडीगढ़ कोर्ट ने जमानत ठुकराई, जज बोले- किसी की भी छवि खराब करने का नहीं मिल सकता लाइसेंस




चंडीगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा कथित भ्रामक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के मामले में गिरफ्तार आरोपी हसन मोहिउद्दीन सिद्दीकी को जिला अदालत से दूसरी बार भी राहत नहीं मिली। अदालत ने उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता असीमित अधिकार नहीं है और इसका इस्तेमाल किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं किया जा सकता। एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज रोहित वत्स ने अपने आदेश में कहा कि सोशल मीडिया पर बेलगाम और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां सभ्य समाज के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि प्रधानमंत्री जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की गरिमा और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री साझा करना उनकी छवि पर सीधा हमला है। कोर्ट ने कहा कि यदि इस तरह की गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगाया गया तो सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को किसी भी व्यक्ति की प्रतिष्ठा धूमिल करने का खुला लाइसेंस मिल जाएगा। भाजपा के पूर्व पार्षद की शिकायत पर FIR यह मामला 19 अप्रैल को सामने आया था, जब भाजपा के पूर्व पार्षद एवं एडवोकेट सतिंदर सिंह ने चंडीगढ़ पुलिस को शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कुछ सोशल मीडिया यूजर्स प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो भ्रामक कैप्शन के साथ प्रसारित कर रहे हैं। शिकायत में हसन मोहिउद्दीन सिद्दीकी और मधु किश्वर समेत छह सोशल मीडिया हैंडल्स का उल्लेख किया गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार यह वीडियो सबसे पहले अमेरिका में रहने वाले एक सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर द्वारा पोस्ट किया गया था, जिसे बाद में प्रधानमंत्री मोदी से जोड़कर विभिन्न प्लेटफॉर्म पर वायरल किया गया। शिकायत के आधार पर सेक्टर-26 थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। कोर्ट ने नहीं माना बचाव पक्ष का तर्क सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से दलील दी गई कि उसने प्रधानमंत्री के खिलाफ कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की थी। बचाव पक्ष का कहना था कि आरोपी ने केवल वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल ग्रोक से यह पूछा था कि वीडियो असली है या नहीं। हालांकि अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने वीडियो पोस्ट करते समय प्रधानमंत्री का नाम भी लिखा था और केवल अंत में यह जोड़ दिया था कि क्या वीडियो असली है। ऐसे में प्रथम दृष्टया उसे पूरी तरह निर्दोष नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। एक आरोपी गिरफ्तार, दूसरी की तलाश जारी मामले में पुलिस ने हसन मोहिउद्दीन सिद्दीकी और मधु किश्वर समेत छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। हसन को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि मधु किश्वर अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। उनकी अग्रिम जमानत याचिका भी पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है।



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